मध्य प्रदेश

उच्च शिक्षा विभाग: जनभागीदारी समिति से सांसदों का रखा जायेगा दूर

भोपाल
उच्च शिक्षा विभाग के 516 कॉलेजों में एक भी 28 सांसद दखलअंदाजी नहीं कर पाएंगे। उन्हें जनभागीदारी समिति से दूर रखा जा रहा है। जबकि विधायकों को उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए पूरी जिम्मेदारी सौंपने की व्यवस्था की जा रही है। इसके तहत तीन दर्जन विधायकों को कालेजों की जनभागीदारी समितियों का अध्यक्ष नियुक्त कर दिए है।

प्रदेश में कांग्रेस से सिर्फ नकुलनाथ छिंदवाड़ा सांसद हैं। शेष 28 सांसद भाजपा के हैं। शासन अपने 516 कालेजों में अध्यक्षों की नियुक्ति कर रहा है। इसमें सिर्फ विधायकों को ही अध्यक्ष बनाया जा रहा है। जबकि अधिनियम में सांसद और विधायकों को अध्यक्ष बनाने की व्यवस्था है। प्रदेश में एक छोड़ सभी भाजपा के सांसद हैं, जिसके उन्हें अध्यक्ष के अलावा अन्य सदस्यों में भी शामिल नहीं किया जाएगा। विभाग ने 136 अध्यक्षों की सूची जारी की है। इसमें 35 विधायक शामिल हैं। आगामी सूची में भी सांसदों को छोड़ विधायकों को शामिल किया जाएगा।

प्रदेश के संसदीय क्षेत्रों में सांसद और विधायक भाजपाई हैं। ऐसे स्थानों पर शासन कांग्रेसी समाजसेवियों को कालेजों का अध्यक्ष नियुक्त करेगा। विभाग द्वारा बनाए गए अध्यक्षों का पुलिस वेरीफिकेशन कराया जाएगा। उनके खिलाफ कोई गंभीर आरोप होने के साथ महिलाओं के दुर्व्यहार या छेड़छाड़ करने जैसी घटनाओं में लिप्त पाया जाता है, तो समाजसेवियों से अध्यक्षों की कुर्सी छीन ली जाएगी। उनके स्थान पर किसी अन्य समाजसेवी को अध्यक्ष की कुर्सी आसीन किया जाएगा।

विभाग ने तीन दर्जन विधायकों को कालेज अध्यक्ष नियुक्त किया है। उक्त कालेजों पर मुख्यमंत्री कमलनाथ की नजर बनी हुई हैं। वे कालेजों में बड़ा फंड देने जा रहे हैं। इससे कालेजों की स्थिति में काफी सुधार होगा। उक्त कालेजों में स्मार्ट क्लास रूम बनाने के अलावा भी कराने का ब्लू प्रिंट तक तैयार कर लिया गया है। कालेजों में बड़ा फंड दिया जाना हैं, जिसका उपयोग करने के लिए अध्यक्ष की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए विभाग अन्य लोगों को जिम्मेदारी देकर कोई जोखिम लेना नहीं चाहते था, जिसके कारण विधायकों की निगरानी होने के साथ मुख्यमंत्री नाथ भी विधायकों से सीधे संवाद कर कालेजों का अपडेट लेते रहेंगे।

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