छत्तीसगढ़

एन.जी.जी.बी. के क्रियान्वयन हेतु बेहतर वातावरण बनाने का आग्रह किया

जांजगीर-चांपा 
कलेक्टर ने जिले के सभी सरपंचों को दीपावली की शुभकामना पत्र भेजते हुए गौठान के सुव्यस्थित संचालन एवं गौठानों मंे पैरादान के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने पत्र में कहा है कि शासन-प्रशासन द्वारा निर्देशित और आदेशित योजनाओं को जमीनी स्तर पर कार्यान्वित करने के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया जाए। राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरवा और बारी के प्रबंधन एवं संवर्धन का क्रियान्वयन प्रारंभ हो गया है। हमारे गांव पारंपरिक स्त्रोतों के माध्यम से समृद्ध होंगे। जिले के 149 ग्राम पंचायतों मंे गायों के लिए सुव्यवस्थित गौठान तैयार किया गया है। भविष्य मंे सभी ग्राम पंचायतों में यह व्यवस्था चरणबद्ध रूप से लागू की जाएगी। जिले में आवारा पशुओं की संख्या और गौपालकों के पास उपलब्ध मवेशी बड़ी संख्या में है। इनके रख-रखाव एवं देखभाल तथा चारा की व्यवस्था भी जरूरी है। पशुओं के चरने के लिए शासकीय गौचर भूमि भी ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध है। कतिपय लोगांे द्वारा गौचर भूमि को अतिक्रमण कर लिये जाने की सूचना भी मिलती रहती है। मवेशियों के लिए चारागाह महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीणों के सहयोग से अतिक्रमण मुक्त कराने का भी कार्य किया जा रहा है।

कलेक्टर ने पत्र के माध्यम से धान की फसल कटने के बाद पैरा को गौठानों में रखे पशुओं के लिए दान करने का आग्रह किया है। गायों के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए पैरादान जरूरी भी है। पैरादान के लिए स्थानीय स्तर पर प्रचार करने हेतु मुनादी कराने को भी कहा है। हमारी वैदिक और भारतीय परंपरा में गाय को माता के रूप में पूजनीय है। गौमूत्र और गोबर को हमारे पूर्वजांे ने पवित्र और शुद्ध मानकर पूजा-पाठ एवं सांस्कृतिक अनुष्ठानों में इसका उपयोग किया जाता है। पारंपरिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए गायों एवं उनके वंश (बछिया, बछड़ा) का उचित पालन-पोषण बड़ी सेवा है। उन्होंने पत्र के अंत में सरपंचो व ग्रामीणों से आशा व्यक्त किया है कि नरवा, गरवा, घुरवा और बारी के संरक्षण व सवंर्धन की योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे।
 

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