मध्य प्रदेश

कमलनाथ सरकार एक ‘वचन’ और पूरा करेगी : मध्य प्रदेश में बनेगी विधान परिषद

भोपाल
मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में कमलनाथ सरकार (kamalnath government) अपने एक और चुनावी वचन को पूरा करने जा रही है. उसने विधान सभा परिषद (Legislative Assembly Council) के गठन की तैयारी शुरू कर दी है. विधान परिषद का खाका तैयार किया जा रहा है.आज मुख्य सचिव एस आर मोहंती (Chief Secretary SR Mohanty) बैठक ले रहे हैं जिसमें परिषद के प्रारूप पर चर्चा की जाएगी.बैठक के बाद इस मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा.

कांग्रेस ने विधान सभा चुनाव में अपने वचनपत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद विधान परिषद का गठन किया जाएगा. पार्टी सत्ता में आयी और उसने अपने वादे के मुताबिक तैयारी शुरू कर दी. संसदीय कार्य विभाग ने कानूनी प्रावधानों के अनुसार इसका खाका बनाकर विधि विभाग से परीक्षण कराया था और संबंधित विभाग से राय भी मांगी थी.संसदीय कार्य विभाग ने परिषद पर होने वाले अनुमानित खर्च का खाका भी तैयार किया है.इसके अनुसार विधान परिषद में विधान परिषद सदस्य और अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर ही सालाना करीब साढ़े 26 करोड़ रुपए खर्च होंगे. बाक़ी व्यवस्था पर सवा छह करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है.

कहां-कितना खर्च

  • विधानसभा बजट में राशि परिषद पर खर्च
  • दौरा व्यय, आतिथ्य पर व्यय 85 लाख 85 लाख
  • विधायक वेतन-भत्ते 27.5 करोड़ रु. 9.16 करोड़
  • विधायक यात्रा भत्ता 9.5 करोड़ रु. 3.16 करोड़
  • विधायक कार्यालय पर व्यय 2.35 करोड़ रु. 78 लाख रु.
  • अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन-भत्ते 70 करोड़ रु. 12 करोड़ रु.

इन खर्चों के अलावा फर्नीचर और कम्प्यूटर पर 5 करोड़ रुपए, गाड़ियों पर 1 करोड़ और फोन पर 25 लाख रुपए सहित कुल 32.75 करोड़ रु खर्च होने का अनुमान है.

कांग्रेस का कहना है सीएम कमलनाथ पार्टी के वचन पत्र के मुताबिक कदम-दर-कदम आगे बढ़ रहे हैं. आर्थिक मंदी के बावजूद सरकार अपने वचनों को पूरा कर रही है. मंत्री पीसी शर्मा की मानें तो आने वाले दिनों में बिना केन्द्र से मदद लिए राज्य सरकार तमाम वचनों को पूरा करेगी. बीजेपी का कहना है सरकार जो भी फैसला करे उसे विपक्ष से भी सहमति लेना चाहिए ताकि प्रजातंत्र को और मज़बूती मिल सके.
ऐसी होगी विधान परिषद

सरकार 70 से 75 सदस्यों की परिषद गठित करने पर विचार कर रही है. इसके लिए खर्च का अनुमान विधानसभा में होने वाले खर्च के आधार पर लगाया जा सकता है. इसमें विधानसभा के मुकाबले एक तिहाई सदस्य ही हो सकते हैं. इसके अध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी अलग होंगे. इनके और एमएलसी के वेतन-भत्ते औऱ दर्जा विधानसभा सदस्यों के बराबर होगा.

आठवां राज्य- विधान परिषद का गठन अगर मध्यप्रदेश में हो गया तो एमपी देश का आठवां राज्य होगा जहां ये परिषद बनेगी. इससे पहले उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर में परिषद बन चुकी है.

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