राजनीति

तब 50-50 फॉर्मूले पर अड़ी थी बीजेपी, …और महाराष्ट्र में बन गई थी कांग्रेस-NCP की सरकार

नई दिल्ली
महाराष्‍ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच घमासान जारी है. सरकार गठन के लिए बीजेपी के सामने शिवसेना 50-50 के फॉर्मूले को रख रही है. महाराष्ट्र की सत्ता में 50-50 का फॉर्मूला1999 में बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे ने दिया था, मगर तब शिवसेना राजी नहीं हुई थी. ऐसे में गठबंधन सरकार नहीं बन पाई थी. इस बार 50-50 की यह शर्त शिवसेना की ओर से रखी जा रही और अब बीजेपी इस पर सहमत नहीं दिख रही है.

बता दें कि महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54, कांग्रेस को 44 और अन्य को 29 सीटें मिली हैं. इस तरह से बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के पास बहुमत के आंकड़े हैं, लेकिन सीएम पद और 50-50 फॉर्मूले पर फंसे पेच के चलते मामला अभी तक अटका हुआ है.

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद ही बीजेपी को 50-50 फॉर्मूले की याद दिलाई है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने साफ और कड़े लहजे में महाराष्ट्र में अपनी सहयोगी बीजेपी से कहा था, 'लोकसभा चुनाव में अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस के साथ जो तय हुआ था, उससे न कम और न ज्यादा चाहिए. उससे एक कण भी अधिक मुझे नहीं चाहिए.' यानी, ढाई साल सीएम का पद उनके पास और ढाई साल बीजेपी के पास रहे.

दरअसल 1999 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. महाराष्ट्र की 288 सीटों में से कांग्रेस को 75, एनसीपी 58, शिवसेना को 69, बीजेपी को 56, निर्दलीय 12 और अन्य को 18 सीटें मिली थी. ऐसे में बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे ने 1999 में बीजेपी सामने 50-50 का फॉर्मूला रखा था, जिस पर शिवसेना राजी नहीं हुई थी. इसके चलते वह सरकार नहीं बना सके और कांग्रेस और एनसीपी ने मिलकर सत्ता पर काबिज हुए थे. उस समय विलासराव देशमुख मुख्यमंत्री बने थे.

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद खींचतान के बीच देवेंद्र फडणवीस मंगलवार को कहा कि शिवसेना की मांगों पर मेरिट के आधार पर विचार हो रहा है, हमारे पास कोई प्लान B या C नहीं है, ये बात पक्की है कि मैं ही मुख्यमंत्री बनूंगा. देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हमारे पास दस निर्दलीय विधायकों का समर्थन है, जल्द ही ये संख्या 15 तक पहुंचेगी. मुख्यमंत्री पद को लेकर कभी कोई 50-50 फॉर्मूला तय नहीं हुआ.उन्होंने कहा कि शिवसेना की अगर कोई डिमांड है, तो उन्हें हमारे पास आना चाहिए. इसका मतलब साफ है कि बीजेपी महाराष्ट्र में शिवसेना के सीएम पद की मांग को किसी भी सूरत में मानने को तैयार नहीं है.

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