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गुजरात के CM से देश के PM तक, पटेल पर हिट रही है मोदी की नीति

 
नई दिल्ली 

नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय फलक पर आने के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल की राजनीतिक तौर पर अहमियत बढ़ी है और भारतीय जनता पार्टी के राज में सरदार पटेल का कद लगातार बढ़ता ही जा रहा है. कांग्रेस राज में पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी जैसे नेताओं का जोर दिखता था और आजाद भारत को संगठित करने वाले सरदार पटेल नेपथ्य में थे, लेकिन मोदी पटेल को राष्ट्रीय फलक पर लेकर आए और उनकी यह रणनीति बेहद कामयाब साबित हुई.

प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी गुजरात में मुख्यमंत्री थे और वह यहां 2001 से 2014 तक इस पद पर रहे. मोदी अपने मुख्यमंत्रित्व काल में सरदार पटेल को लगातार आगे करते रहे. यह उनकी ही रणनीति का हिस्सा रहा कि पटेल भारत के आजाद होने के 70 साल बाद अब लगातार चर्चा में रहते हैं.

पटेल के प्रधानमंत्री नहीं बनने की कसक
केंद्र में आने से पहले नरेंद्र मोदी 2013 में गुजरात के मुख्यमंत्री थे और 20 अक्टूबर को गुजरात में एक कार्यक्रम में वह तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एक साथ मंच पर उपस्थित थे. इसी मंच से मोदी ने कहा था, 'हर भारतीय के मन में आज तक इस बात की कसक है कि देश के पहले प्रधानमंत्री सरदार पटेल नहीं बने. अगर पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री होते तो भारत की तस्वीर कुछ और होती.'

इसके इतर मोदी की सख्त फैसले लेने की छवि को देखते हुए कई नेता उनकी तुलना सरदार पटेल से भी करते हैं. अगस्त 2013 में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्विटर पर कहा था कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कद और काम की तुलना केवल सरदार पटेल से ही हो सकती है.

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