धर्म

मां-बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद है ब्रेस्टफीडिंग

दादी-नानी के जमाने से यही कहा जाता रहा है कि नवजात शिशु के लिए मां का दूध ही सबसे अच्छा होता है। यही नहीं, स्टडीज के बाद यह बात साबित भी हो चुकी है कि मां के दूध में फैट, शुगर, पानी और प्रोटीन की सही क्वॉन्टिटी होती है, जो शिशु की अच्छी सेहत के लिए बेहद जरूरी है। हाल ही में आई साइंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे के जन्म के तुरंत बाद या कुछ ही घंटों के भीतर अगर बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करायी जाए तो ‘शिशु मृत्यु दर’ काफी कम हो सकती है। हालांकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की साल 2017 की रिपोर्ट में पता चला है कि जन्म के 1 घंटे के अंदर मात्र 44 फीसदी बच्चों को ही मां का पहला दूध मिल पाता है।

बच्चे का असली फूड है मां का दूध
ब्रेस्टफीडिंग एक नैचरल प्रोसेस है। बच्चा जैसे ही पैदा होता है, मां के ब्रेस्ट में दूध बनना शुरू हो जाता है और कई महीनों तक बच्चे का यही फूड होता है। हां, बच्चे को सही तरह से फीड करवाने के लिए जरूरी है कि मां को ब्रेस्टफीडिंग का सही तरीका पता हो। दरअसल, सही पॉजिशन को जानकर ही बच्चे को सही तरीके से फीडिंग करवाई जा सकती है।

दो से तीन घंटे में कराएं फीड
गाइनैकॉलजिस्ट डॉक्टर सुरभि मलिक कहती हैं, बच्चे को हर 2 से 3 घंटे पर दूध पिलाती रहें। अगर बच्चा दिनभर में 6 से 8 बार यूरिन कर रहा है, तो समझ लीजिए कि उसकी डायट सही है। हां, जब वह 4 से 6 महीने का हो जाए, तो उसे सॉलिड फूड देना शुरू कर दें।

दूध का बनना, डिमांड व सप्लाई पर निर्भर
अगर आप सोच रही हैं कि बच्चे के लिए आपके पास इतना दूध हो पाएगा या नहीं, तो हम आपको बता दें कि ब्रेस्ट मिल्क का प्रॉडक्शन बहुत हद तक उसकी डिमांड व सप्लाई पर निर्भर करता है। आप बच्चे को जितना फीड करवाएंगी, उतना ही अधिक दूध बनेगा। एक स्टेज के बाद बच्चे का विकास तेजी से होता है, इसलिए जिस बच्चे को पहले 3 घंटे में दूध की जरूरत पड़ती है, बाद में उसे हर 1 घंटे में दूध चाहिए होता है। हां, ऐसे में जरूरी होता है कि आप अपनी डायट की क्वॉन्टिटी बढ़ाने के साथ उसमें न्यूट्रिशंस का भी ध्यान रखें।

बॉडी को लड़ने की पावर देता है
– बच्चे के बीमार होने पर मां का दूध उसकी बॉडी को लड़ने की पावर देता है। इससे बच्चे की इम्यूनिटी भी स्ट्रॉन्ग होती है, जो बड़े होने तक उसका साथ निभाती है।

– बच्चे के पैदा होने के बाद कोलोस्ट्रम जो मां का पहला दूध ब्रेस्ट में बनता है वही दूध बच्चे को डायरिया, चेस्ट इन्फेक्शन और दूसरे रोगों से बचाता है।

– नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ और ह्यूमन डिवेलपमेंट (एनआईसीएचडी) की हाल ही में आई रिसर्च के मुताबिक, मां के दूध में फैटी ऐसिड होता है, जो बच्चे के ब्रेन डिवेलपमेंट में मदद करता है।

मांओं के लिए ब्रेस्टफीडिंग के फायदे
ब्रेस्टफीडिंग करवाने से महिला हार्ट प्रॉब्लम, डायबीटीज, ऑस्टियोपोरोसिस बीमारियों से बच सकती है। यही नहीं, यह ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को भी काफी हद तक कम कर देता है। डिप्रेशन को दूर करने में भी यह प्रोसेस बेहद कारगर है। बकौल अजय, फीडिंग करवाते समय महिलाओं की बॉडी से एक हॉर्मोन ऑक्सिटोसिन निकलता है, जिससे वे टेंशन फ्री रहती हैं और अच्छा फील करती है।

स्ट्रॉन्ग बॉन्डिंग
माना जाता है कि बच्चा पूरे जीवन भर पिता से ज्यादा मां के नजदीक इसलिए होता है, क्योंकि मां बच्चे को अपना दूध पिलाकर बड़ा करती है। यही चीज उनके बीच स्ट्रॉग बॉन्डिंग बनाती है। स्टडीज के बाद यह भी पता चला है कि अगर मां बच्चे को अपना दूध नहीं पिलाती, तो उनके बीच अपनापन का खासा भाव नहीं आ पाता।

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