मध्य प्रदेश

विस में दिए मंत्रियों के आश्वासनों का जवाब बनाने में अफसरों को आ रहा पसीना

भोपाल
राज्य विधानसभा में मंत्रियों के जवाब पर बनने वाले आश्वासनों से अधिकारी परेशान हो गए हैं। दरअसल, ऐसे जवाबों पर भी आश्वासन बन रहे हैं, जिन पर सदन में चर्चा ही नहीं होती है। विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र की तैयारियों को लेकर मंत्रालय में मुख्य सचिव सुधिरंजन मोहंती द्वारा लंबित मामलों को लेकर बुधवार को बुलाई समीक्षा बैठक में यह मुद्दा उठा।

सूत्रों के मुताबिक चर्चा के दौरान जब लंबित आश्वासन का मुद्दा आया तो प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा हरिरंजन राव ने सदन में चर्चा में आए बिना तारांकित प्रश्न और अतारांकित प्रश्नों के जवाब पर आश्वासन बन जाने की बात उठाई। सदन में मंत्री जब किसी सवाल का जवाब देते हुए कोई घोषणा करते हैं तो वो आश्वासन बनता है। अपर मुख्य सचिव वित्त अनुराग जैन ने कहा कि कुछ प्रश्नों के उत्तर ऐसे चले जाते हैं, जिनसे ऐसी ध्वनि निकलती है मानो आश्वासन दिया जा रहा हो। इसकी वजह से आश्वासन बन जाते हैं, लेकिन बजट आवंटन से लेकर कई प्रक्रियाएं होती हैं, जिनमें समय लगता है। चर्चा के दौरान कुछ अधिकारियों ने कहा कि जवाब देते समय शब्दों का चयन सावधानी से किया जाना चाहिए। कम्प्यूटरीकरण होने से सॉफ्टवेयर में जो शब्द दर्ज हैं, जैसे ही उत्तर में वे शब्द आते हैं तो आश्वासन बन जाता है। बैठक में अधिकारियों ने यह भी सुझाव रखा कि विधानसभा के अधिकारी प्रशिक्षण दे दें, किन-किन शब्दों को पकड़कर आश्वासन बनते हैं। इस दौरान मौजूद विधानसभा के अपर सचिव वीरेंद्र कुमार ने कहा कि हम आश्वासन से जुड़े मामले को देख रहे हैं।
 
 मंत्रियों को बताएं आश्वासन व उत्तर का भेद
 विभागीय प्रमुखों के जवाब पर मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि वे मंत्रियों को बताएं कि विधानसभा में वे जो कहते हैं उस पर आश्वासन बनता है, इसलिए शब्दों के चयन में एहतियात बरती जाए। अधिकारी भी ध्यान रखें कि जो जवाब बनकर जाएं, उसमें शब्दों का चयन ठीक हो। राजस्व, नगरीय विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग हर 15 दिन में विधानसभा को दिए जाने वाले जवाबों की समीक्षा करें। ऐसा करने पर मामले लंबित नहीं रहेंगे।

उन्होंने शून्यकाल की लंबित सूचनाओं पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। श्री मोहंती ने कहा,कि  विस अध्यक्ष दिसंबर के पहले सप्ताह में लंबित आश्वासनों की समीक्षा करेंगे। इससे पहले लंबित मामलों का निराकरण किया जाए।

विस अध्यक्ष की सख्ती का असर
ज्ञात हो,कि विधानसभा अध्यक्ष एन. पी. प्रजापति ने भी संसदीय कार्य मंत्री डॉ. गोविंद सिंह को निर्देश दिए थे कि लंबित मामलों का निराकरण समय पर होना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष की सख्ती को देखते हुए शीतकालीन सत्र से पहले मुख्य सचिव ने बुधवार को मंत्रालय में लंबित मामलों को लेकर सभी विभाग प्रमुखों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि शून्यकाल की सूचनाओं का जवाब 15 दिन में चला जाना चाहिए। इनका लंबित रहना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हजार से अधिक मामले लंबित
नौ अक्टूबर की स्थिति में सदन में दिए गए 688 आश्वासन, 69 शून्यकाल की सूचनाएं, 282 लोक लेखा समिति की कंडिका और 206 सवालों के मामले लंबित हैं।  विधानसभा सत्र के पहले दिन पिछले सत्र के लंबित मामलों को लेकर प्रतिवेदन पटल पर रखा जाता है। सदन में शून्यकाल की सूचनाओं का जवाब छह-छह माह तक नहीं मिलने, आश्वासनों के पूरा न होने और उत्तर अपूर्ण रहने को लेकर विधायक आपत्ति उठा चुके हैं।

Related Articles

Back to top button
Close
Close