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 DHFL की जांच में एक लाख लोगों की फंस सकती है एफडी

नई दिल्ली 
सरकार वित्तीय अनियमितताओं के लिए संकट में फंसी दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन (डीएचएफएल) के खिलाफ गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) की जांच का आदेश दे सकती है। सूत्रों का कहना है कि ऐसा होने पर डीएचएफएल में एक लाख लोगों की सावधि जमा (एफडी) फंस सकती है। कंपनी पंजीयक, मुंबई कार्यालय ने डीएचएफएल के बारे में रिपोर्ट कुछ दिन पहले कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय को सौंपी है।

अधिकारिक सूत्रों ने कहा कि डीएचएफएल में अनियमितता का मामला एसएफआईओ को सौंपने की काफी वजहें हैं। रिपोर्ट में धन के गबन और उसे इधर-उधर करने का संकेत दिया गया है। अधिकारी ने बताया कि अगले कुछ दिन में यह मामला जांच के लिए एसएफआईओ को भेज दिया जाएगा।
 
डीएचएफएल ने निपटान योजना पेश की थी। उसके अनुसार, कंपनी पर नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) का 41,431 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं बैंकों का 27,527 करोड़ रुपये, 6188 करोड़ की एफडी, 2747 करोड़ रुपये की एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ईसीबी), नेशनल हाउसिंग बैंक (एनएचबी) के 2350 करोड़, सब-कर्ज और पर्पेचुअल कर्ज क्रमश: 2267 करोड़ और 1263 करोड़ रुपये और कमर्शियल पेपर 100 करोड़ रुपये के हैं। इस तरह कंपनी पर कुल 83,873 करोड़ रुपये बकाया है।
 
बैंक सहित अन्य बकायेदारों ने एक निपटान योजना पेश की है। इसके तहत 10 साल में लोगों की राशि बिना ब्याज के वापस की जा सकती है। इसमें एफडी वाले उपभोक्ता जिनमें ज्यादातर सेवानिवृत्त लोग हैं पहली प्राथमिकता में हैं। अभी इस निपटान योजना पर सहमति नहीं बनी है। 
केपीएमजी ने पिछले हफ्ते ही अपनी फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट सौंपी है। इसमें बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक डीएचएफएल ने 25 ऐसी कंपनियों को 14 हजार करोड़ रुपये का कर्ज बांटा है जिनका मुनाफा महज लाख रुपये था। केपीएमजी के फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के मसौदे के अनुसार, डीएचएफएल के प्रमोटर्स ने लगभग 20 हजार करोड़ का बैंक लोन अपनी युनिट्स में ट्रांसफर किया है। सरकार ने डीएचएफएल को कर्ज देने वाले तीन सरकारी बैंकों कंपनी के फंड की जांच को कहा था।

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