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चार आतंकियों को सजा-ए-मौत, एक को उम्र कैद

 रामपुर 
सीआरपीएफ कांड में अदालत ने चार आतंकियों को सजा-ए-मौत, एक आतंकी को उम्र कैद, एक अन्य को दस साल की सजा सुनाई है। रामपुर कोर्ट के एडीजे तृतीय संजय कुमार सिंह ने यह सजा सुनाई। सजा का ऐलान होते ही रामपुर कचहरी में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर दी गई। गौरतलब है कि इस मामले में शुक्रवार को आठ आरोपियों में से छह को कोर्ट ने दोषी करार दिया था। जबकि दो आरोपियों पर आरोप साबित नहीं हो सके थे, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें मामले में बाइज्जत बरी कर दिया था। 31 दिसम्बर 2007 को सीआरपीएफ के ग्रुप सेंटर पर हुए आतंकी हमले में 7 जवान शहीद हुए थे।
 
गौरतलब है कि रामपुर सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हुए आतंकी हमले के 11 साल 10 माह चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद छह आरोपियों को शुक्रवार को दोषी करार दिया गया था। इस बीच वादी पक्ष की ओर से 38 गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज हुए। इनमें फारेंसिक एक्सपर्ट से लेकर एटीएस, यूपी पुलिस और सीआरपीएफ के जवान शामिल हैं। रामपुर सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर 31 दिसंबर 2007 की आधी रात में आतंकी हमला हुआ था। इस मामले की रिपोर्ट सिविल लाइंस कोतवाली के तत्कालीन दरोगा ओमप्रकाश शर्मा की ओर से दर्ज करायी गई थी। इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी। 
 
विवेचना के दौरान पुलिस ने करीब दो सौ गवाहों को दर्शाया था लेकिन, समय-समय पर हुई सुनवायी में कुल 55 गवाह पेश हुए। इनमें से 38 गवाहों की गवाही सिर्फ सीआरपीएफ कांड के संबंध में हुई जबकि 17 गवाहों की गवाही आरोपी फहीम अरशद पर दर्ज एक अन्य मामले में हुई। कोर्ट ने सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हमले में छह आरोपियों को दोषी करार दे दिया। इस मामले में दो आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया है। जिला शासकीय अधिवक्ता दलविंदर सिंह डम्पी ने बताया कि शनिवार को दोषियों को सजा सुनाई जाएगी।

इन्हें किया गया दोष मुक्त
गुलाब खां, निवासी बहेड़ी, जनपद बरेली। 
कौशर खां, निवासी कुंडा, प्रतापगढ़ निवासी कौशर खां।
ये किए गए दोषी करार
 

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