स्वास्थ्य

बढ़ रही है भारतीयों की जिंदगी, जानें कितना जी सकते हैं आप!

स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे को दुरुस्त करने की कोशिशों के बीच यह आंकड़ा थोड़ा खुशी देता है कि भारतीयों की जिंदगी बीते 5 दशकों में 19 साल बढ़ी है। दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाले दूसरे देश में लोगों की जिंदगी में यह इजाफा ऐसे दौर में हुआ है, जब विश्व की 50 करोड़ आबादी की जिंदगी 7 साल कम हो गई है। 1970-75 में पैदा हुए किसी बच्चे से 49 साल, 8 महीने और 12 दिन तक जीने की उम्मीद की जा सकती है वहीं 2012-16 के बीच पैदा हुए बच्चे 69 साल तक सर्वाइव कर सकते हैं, यह बात नैशनल हेल्थ सर्वे की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

अब महिलाओं की जिंदगी होगी पुरुषों से ज्यादा!
गौर करने वाली बात यह है कि अगर भारत में लाइफ एक्सपेटेंसी की बात करें तो पुरुषों की तुलना में महिलाएं हमेशा इस मामले में आगे नहीं रही हैं। 1980 की शुरुआत तक महिलाओं का जीवन पुरुषों की तुलना में कम था। सिर्फ शहरों में महिलाएं पुरुषों से ज्यादा जीती थीं। ऐसा शायद न्यूबॉर्न फीमेल के लिए शहरों में मौजूद बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के चलते था। 1970-75 और 2012-16 के बीच महिलाओं की उम्र करीब 44 फीसदी तक बढ़ी है जबकि पुरुषों की 32 फीसदी तक। इसलिए 1970 के दशक में जन्मी लड़की उसी साल में जन्में लड़कों से करीब छह महीने कम जिएगी। वहीं 2015 में जन्मी लड़की उसी साल जन्मे लड़के से 2 साल, 7 महीने 6 दिन ज्यादा जिएगी।

सबसे कठिन साल
भारत ने शिशु मृत्युदर को 2017 तक काफी कम किया है। पहले 1000 में 57 तक बच्चों की मौत हो जाती थी जो कि अब 33 पर ही रह गई है लेकिन वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो यह अभी भी काफी ज्यादा है। ग्लोबल ऐवरेज 29.4 है, इसीलिए अगर शिशु पैदा होने के पहले साल सर्वाइव कर जाता है तो उनके जीवित रहने की उम्मीद काफी हद तक बढ़ जाती है।

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