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जासूसी: व्हाट्सएप-केंद्र फिर आमने सामने, कंपनी पर सरकार ने किया पलटवार

नई दिल्ली 
                                               –                                                                                                                                        
व्हाट्सएप द्वारा जारी बयान के बाद केंद्र ने कहा कि कंपनी द्वारा दी गई सूचना अधूरी थी। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि उसे व्हाट्सएप से जो सूचना मिली थी वह अपर्याप्त और अधूरी थी। आईटी मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि उन्हें व्हाट्सएप से जवाब मिल गया है और अभी उसका अध्ययन किया जा रहा है। इस पर जल्द अंतिम राय तय की जाएगी। 

आईटी मंत्रालय के अधिकारियों ने इस बात को माना कि उन्हें पूर्व में भी व्हाट्सएप से इस बारे में सूचना मिली थी। हालांकि उन्होंने कहा कि पहले मिली सूचना अपर्याप्त और अधूरी थी। साथ ही उसमें काफी अधिक तकनीकी शब्दावली का इस्तेमाल किया गया था। व्हाट्सएप ने यह खुलासा नहीं किया था कि किसके कहने पर पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के फोन हैक किए गए हैं। यह भी नहीं बताया कि भारत में कितने लोगों को इस जासूसी का निशाना बनाया गया या वे कौन लोग हैं। कंपनी ने कहा, मई में एक ऐसे साइबर हमले का पता चला जिसमें उसकी वीडियो कॉलिंग प्रणाली के जरिये प्रयोगकर्ताओं को मालवेयर भेजा गया।
 

मालूम हो कि व्हाट्सएप ने रविवार को कहा कि हमने भारत सरकार को सितंबर में ही स्पाईवेयर पेगासस के बारे में अलर्ट किया था। कंपनी ने कहा कि हमने भारत सरकार को बताया था कि 121 भारतीय प्रयोगकर्ताओं को इजरायली स्पाइवेयर पेगासस ने निशाना बनाया है।

केंद्र को पिछले सप्ताह भेजे जवाब का ब्योरा देने से इनकार करते हुए व्हाट्सएप ने बताया, उसने भारत सरकार को सितंबर में भी इसके बारे में सतर्क किया था। मई में इसकी जानकारी देने के बाद सितंबर में दूसरी बार सरकार को जानकारी दी गई थी। व्हाट्सएप ने कहा वह एनएसओ ग्रुप के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रही है। यह इजराइली कंपनी है जो निगरानी करने का काम करती है।
 
समझा जाता है कि इसी कंपनी ने वह प्रौद्योगिकी विकसित की है जिसके जरिये कुछ इकाइयों के जासूसों ने 1,400 लोगों के फोन हैक किए हैं। इन इकाइयों का नाम नहीं बताया गया है लेकिन कहा गया है जिन लोगों के फोन हैक हुए हैं वे चार महाद्वीपों में फैले हैं। इनमें राजनयिक, राजनीतिक विरोधी, पत्रकार और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल हैं।

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