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रोड ऐक्सिडेंट: मौत के मामले में दिल्ली अव्वल

नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली में आए दिन सड़क हादसे होते रहते हैं। ट्रैफिक पुलिस के डेटा के मुताबिक, चेन्नै, कोलकाता और मुंबई में 2018 में सड़क हादसे में मरने वालों की संख्या में कमी आई है, जबकि दिल्ली में यह संख्या बढ़ी है। 2017 के मुकाबले 2018 में दिल्ली में 106 ज्यादा लोगों की मौत सड़क हादसे में हुई है। दिल्ली में 2018 में 1690 लोगों की मौत हुई, जबकि 2017 में 1584 लोगों की मौत हुई थी, । 2016 में 1591 लोगों की मौत हुई थी।

दिल्ली में 2018 में 1690 लोगों की मौत
ट्रैफिक पुलिस के डेटा के मुताबिक, चेन्नै में 2018 में 1260 लोगों की दुर्घटना में मौत हुई, जबकि 2017 में 1299 लोगों की मौत हुई थी। कोलकाता में 2018 में 294 लोगों की मौत हुई, जबकि 2017 में 329 लोगों की मौत हुई थी। वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई में 2017 में 490 लोगों की मौत हुई थी और 2018 में 475 लोगों की मौत हुई।

2018 में 17700 लोगों की मौत
इस रिपोर्ट पर गौर करें तो पटना, आगरा, सूरत, इलाहाबाद, जोधपुर, नासिक, राजकोट, भोपाल और थ्रिसुर जैसे छोटे शहरों में दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़ी है। 2017 में ऐसे शहरों में हादसे में मरने वालों की संख्या 17 हजार थी, जबकि 2018 में यह आंकड़ा बढ़कर 17,700 पर पहुंच गया।

छोटे शहरों में ज्यादा हादसे
रोड सेफ्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि महानगरों के मुकाबले छोटे शहरों में हादसे में मरने वालों की संख्या ज्यादा है। इसलिए यहां ट्रैफिक रूल्स को मजबूती के साथ लागू करने की जरूरत है। जानकारी के लिए बता दें कि पूरे देश में ट्रैफिक पुलिस की संख्या करीब 72 हजार है, जबकि रजिस्टर्ड गाड़ियों की संख्या 20 करोड़ के करीब है।

टेक्नॉलजी के इस्तेमाल पर जोर
इंटरनैशनल रोड फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष केके कपालिया का कहना है कि छोटे शहरों में टेक्नॉलजी की मदद से हादसों पर लगाम लगाया जा सकता है। हमें हादसों के कारणों के सतह तक पहुंचना होगा। हाल ही में नए मोटर वीइकल ऐक्ट को लागू किया गया है। इस ऐक्ट में टेक्नॉलजी के बेहतर इस्तेमाल पर बल दिया गया है।

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