व्यापार

RCom से रिकवरी के विकल्प खोज रहा DoT

नई दिल्ली
रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) से लगभग 20,000 करोड़ रुपये की बकाया रकम रिकवर करने के लिए टेलीकॉम डिपार्टमेंट (DoT) विकल्प तलाश रहा है। आरकॉम बैंकरप्सी का सामना कर रही है। DoT के पास रिलायंस जियो इन्फोकॉम का बकाया रकम के एक हिस्से के लिए जवाबदेह बनाने या नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) में क्लेम दाखिल करने का विकल्प है। NCLT में अनिल अंबानी की इस टेलिकॉम कंपनी की बैंकरप्सी प्रोसीडिंग चल रही है। आरकॉम पर बकाया रकम अजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ी है।

जियो ने 2016 में स्पेक्ट्रम ट्रेडिंग ऐग्रीमेंट के तहत आरकॉम से 13 सर्कल में स्पेक्ट्रम खरीदा था। नियमों के अनुसार, स्पेक्ट्रम बेचने वाली टेलिकॉम कंपनी को कोई डील करने से पहले सभी बकाया रकम चुकानी होती है। इसके बाद कोई भी बकाया रकम स्पेक्ट्रम खरीदने वाली कंपनी की जिम्मेदारी बन जाती है।

हालांकि जियो से जुड़े सूत्रों का कहना है कि टेलिकॉम ट्राइब्यूनल की ओर से फरवरी 2019 में दिए गए ऑर्डर में कहा गया था कि जियो आरकॉम की स्पेक्ट्रम से संबंधित पिछली बकाया रकम के लिए जिम्मेदार नहीं होगी। इस ऑर्डर के खिलाफ DoT की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में खारिज कर दिया था लेकिन टेलिकॉम डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य टिप्पणी की ओर इशारा किया। इसमें कहा गया था, 'डील के नाकाम होने का कारण यह था कि जियो का आरकॉम की देनदारियों की जिम्मेदारी नहीं लेना था। डील DoT की ओर से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट नहीं मिलने के कारण असफल नहीं हुई थी।'

इस बारे में आरकॉम और जियो ने ईटी की ओर से भेजे गए प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया। अगर DoT की ओर से NCLT में अपील की जाती है तो उसे एक ऑपरेशनल क्रेडिटर के तौर पर आरकॉम के खिलाफ क्लेम दाखिल करना होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस विकल्प के साथ एक समस्या यह है कि क्लेम के भुगतान के लिहाज से ऑपरेशनल क्रेडिटर्स काफी बाद में आते हैं। ऑपरेशनल क्रेडिटर्स को आमतौर पर अपनी बकाया रकम का बहुत कम हिस्सा मिलता है।

AGR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लगभग 15 टेलिकॉम कंपनियों पर लाइसेंस फीस, स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज, ब्याज और पेनल्टी के तौर पर 1.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बकाया रकम हो गई है। हालांकि इनमें से केवल तीन प्राइवेट टेलिकॉम कंपनियां, भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और जियो अभी बिजनस में हैं। भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को संयुक्त तौर पर लगभग 80,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। सितंबर 2016 में सर्विसेज शुरू करने वाली जियो पर केवल 41 करोड़ रुपये बकाया हैं। बाकी की करीब 50,000 करोड़ रुपये की बकाया रकम में आरकॉम को लगभग 20,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है।

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