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बगदाद एयरपोर्ट के पास अमेरिकी हवाई हमले में ईरानी मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की मौत

बगदाद
फ्लोरिडा में अपने घर पर छुट्टियां मना रहे अमेरिकी राष्ट्रपति ने गुरुवार आधी रात (भारतीय समयानुसार शुक्रवार सुबह 8 बजे ) एक ट्वीट किया। इसमें ट्रंप ने एक शब्द नहीं लिखा, बस अमेरिका के झंडे को पोस्ट भर कर दिया। दरअसल ट्रंप के इस ट्वीट की क्रोनोलॉजी इराक के बगदाद में अमेरिकी सेना के उस एयर स्ट्राइक से जुड़ी थी, जिसमें उसने ईरान के सबसे ताकतवर जनरल कासिम सुलेमानी को मार डाला।

इस हमले के कुछ घंटे बाद ही किया गया ट्रंप का यह ट्वीट विजयी जश्न और ईरान के लिए संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। ईरान की अत्‍यंत प्रशिक्षित कुद्स फोर्स के प्रमुख सुलेमानी का काफिला बगदाद एयरपोर्ट की ओर बढ़ रहा था, इसी दौरान अमेरिका ने हवाई हमला कर दिया। इस हमले में ईरान समर्थित पॉप्‍युलर मोबलाइजेशन फोर्स के डेप्‍युटी कमांडर अबू मेहदी अल मुहांदिस के भी मारे गए। बाद में अमेरिका ने ऐलान भी किया कि सुलेमानी को मारने का आदेश सीधे ट्रंप ने ही दिया था।

ईरान रिवॉलूशनरी गार्ड्स की ही विदेशों में काम करने वाली यूनिट कुद्स फोर्स का जिम्मा संभालने वाले कासिम को अमेरिका के बड़े दुश्मनों में शुमार किया जाता था। अमेरिका के कट्टर प्रतिद्वंद्वी ईरान के लिए वह कितने अहम थे, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि पश्चिम एशिया में किसी भी मिशन को वही अंजाम देते थे।

4 दशकों से अमेरिका के लिए सिरदर्द थे कासिम सुलेमानी
खासतौर पर इराक में उनकी अहम भूमिका थी। बगदाद को इस्लामिक स्टेट के आतंक से बचाने के लिए उनके ही नेतृत्व में ईरान समर्थक फोर्स का गठन हुआ था, जिसका नाम पॉप्युलर मोबिलाइजेशन फोर्स था। सुलेमानी अमेरिका के कितने पुराने दुश्मन थे, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1980 के दशक में ईरान और इराक के बीच खूनी जंग में उनकी अहम भूमिका थी। इस युद्ध में अमेरिका ने इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन का साथ दिया था।

इराक में बनाई थी ईरान समर्थक मिलिशिया
इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट जैसे खूंखार आतंकी संगठन के मुकाबले उन्होंने कुर्द लड़ाकों और शिया मिलिशिया को एकजुट करने का काम किया था। इराक में ईरान के समर्थन से तैयार पॉप्युलर मोबिलाइजेशन फोर्स को कासिम ने ही तैयार किया था। कासिम सुलेमानी का मारा जाना ईरान के लिए बड़े झटके की तरह है, जो इराक और सीरिया में अमेरिकी दखल के खिलाफ है। माना जाता है कि सुलेमानी ने हथियार बंद संगठन हिजबुल्लाह, फिलिस्तीन में सक्रिय आतंकी संगठन हमास को समर्थन दिया था। सीरिया में बशर अल-असद सरकार को भी कासिम सुलेमानी का समर्थन प्राप्त था।

दुश्मनों को कुचलने के लिए थे मशहूर सुलेमानी
ईरान के सुदूर दक्षिणपूर्व इलाके के एक गरीब परिवार से आने वाले सुलेमानी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड में शामिल हुए थे। इस गार्ड का गठन देश की सुरक्षा और विचारधारा को कड़ाई से लागू करने के लिए किया गया था। पड़ोसी इराक के साथ 1980 और 1988 में हुए युद्ध के दौरान रिवॉल्यूशनरी गार्ड के पास राजनीतिक और आर्थिक शक्ति भी आई। इराक में हुए खूनी संघर्ष ने सुलेमानी को आगे बढ़ने में काफी मदद पहुंचाई। उम्र के 20वें साल में ही सुलेमानी ने दुश्मनों के खिलाफ कई मिशन को अंजाम दिया। उन्हें ईरान के दुश्मनों को कुचलने के लिए जाना जाता है। 1990 के दशक के आखिरी सालों में उन्हें कुद्स गार्ड का चीफ बना दिया गया। कुद्स गार्ड के ऊपर लेबनान में हिजबुल्लाह को बढ़ावा देने का आरोप लगा

अमेरिकी दूतावास पर हमले का लिया बदला?
कासिम सुलेमानी को अमेरिका ने ऐसे वक्त में मारा है, जब कुछ दिनों पहले ही बगदाद स्थित उसके दूतावास पर हुए हमले में ईरान का हाथ होने की बात सामने आ रही थी। इस हमले के बाद अमेरिका रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने कहा था कि खेल अब बदल चुका है। उन्होंने कहा था कि ईरान के समर्थन वाले सशस्त्र बलों का अमेरिकी मिलिट्री फोर्सेज की ओर से भी करार जवाब दिया जाएगा।

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