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US-ईरान तनाव से बढ़े कच्चे तेल के दाम

नई दिल्‍ली

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है. दरअसल, अमेरिका ने बगदाद एयरपोर्ट पर एयर स्ट्राइक किया. इस हवाई हमले में ईरानी मेजर जनरल कासिम सुलेमानी समेत 8 लोगों के मारे जाने की खबर है. कासिम के अलावा इराक में ईरानी समर्थक सशस्त्र बल के डिप्टी कमांडर अबू महदी अल-मुहांदिस की भी मौत हो गई.

कच्‍चे तेल के भाव में 4 फीसदी की तेजी

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की वजह से कच्‍चे तेल के भाव में 4 फीसदी की तेजी आ गई है. बता दें कि अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर पिछले कुछ महीनों से कच्‍चे तेल के भाव में तेजी देखने को मिल रही है.अक्टूबर 2019 में  कच्‍चे तेल का भाव 59.70 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था. वहीं नवंबर में यह करीब 63 डॉलर हो गया. इसी तरह दिसंबर में कच्‍चे तेल का भाव 65 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है.

भारत के लिए खतरे की घंटी!

कच्‍चे तेल के भाव में तेजी की वजह से भारत में महंगाई बढ़ने की आशंका है. दरअसल, कच्चे तेल के भाव बढ़ने की वजह से हमें दूसरे देशों से इसे खरीदने पर खर्च अधिक करना पड़ता है और चालू खाता घाटा भी बढ़ जाता है. कच्‍चे तेल के भाव में उछाल की वजह से रुपये पर भी दबाव बढ़ जाता है. ऐसे में भारत को तेल खरीदने पर अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं.

कच्‍चे तेल में तेजी का आप पर असर

कच्‍चे तेल के भाव में तेजी की वजह से तेल कंपनियों पर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का दबाव बढ़ जाता है. पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ने की वजह से महंगाई बढ़ जाती है. महंगाई का असर सब्‍जी से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी में इस्‍तेमाल होने वाले प्रोडक्‍ट पर भी पड़ता है. महंगाई कम होने की वजह से रिजर्व बैंक पर दबाव कम रहता है और ऐसे में वह ब्याज दर में कटौती कर सकता है. ब्‍याज दर कटौती का मतलब ये है कि आपके लोन और ईएमआई कम हो जाते हैं.

यहां बता दें कि भारत अपनी कुल जरूरत का 80 फीसदी से अधिक तेल आयात करता है. एक अनुमान के मुताबिक तेल की कीमतों में प्रति डॉलर बढ़त से भारत का सालाना आयात बिल 10,700 करोड़ रुपये बढ़ जाता है. साल 2018-19 में भारत ने 111.9 अरब डॉलर मूल्य के तेल का आयात किया था.

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