छत्तीसगढ़

ऐसे में हनुमान चालीसा का आश्रय जरूरी: दीदी मंदाकिनी

रायपुर। आज भारतीय संस्कृति संक्रमण काल से गुजर रही है। नैतिकता और भौतिकता के अग्राह्य में इस समय मिथ्याचार, भ्रष्टाचार, दंभ, पाखंड, हिंसा, अधर्म के प्रचार में पूर्ण रूप से सक्रिय हैं। अश्लील और आसुरी साजो सामान सजाए जा रहे हैं, शुद्ध आचरण ध्वस्त हैं। मानवीय मूल्यों में तेजी से गिरावट आ रही है। हमें अपनी वर्तमान ही नहीं बल्कि भावी     पीढ़ी को भी इस प्रवृत्ति से बचाना होगा। ऐसी विभीषिका में रामायण स्वरूप युग तुलसी परम पूज्य महाराज श्री राम किंकर जी के चिंतन धारा का प्रत्येक सूत्र टूटती मानवीय आस्था को सुदृढ़ और सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहा है।
ऐसे में समाज प्रबंधन और धर्म प्रबंधन के लिए हनुमान चालीसा का आश्रय लेना होगा। हनुमान चालीसा हर युग में प्रासंगिक है। श्री हनुमानजी कलयुग के प्रत्यक्ष व अमर देवता हैं। राम चरित मानस के बाद तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा की रचना की है। गोस्वामी जी ने लिखा है-जो यह पढ़े हनुमान चालीसा-होई सिद्धि साखी गौरीसा।। मानस मर्मज्ञ दीदी मंदाकिनी ने बताया कि अनादि देव भगवान महादेव के हस्ताक्षर इस सत्य को प्रमाणित कर रहे हैं कि जो इस ग्रंथ का आश्रय लेगा उनकी हर मनोकामना पूरी होगी। मान्यता यह है कि शिव के ईष्ट देव हैं भगवान राम और अपने प्रभु आराध्य की सेवा करने के लिए ही शिव ने वानर का रूप धारण किया है और यह संदेश भी दिया है कि भगवान की सेवा करने के लिए न तो उच्च कुल की या उच्च गोत्र की आवश्यकता है। यदि सेवा करनी है तो बंदर का भी स्वागत है जो हर दृष्टि से चंचल और विकार से ग्रस्त है।
उन्होने हनुमान चालीसा और कथा पुराण में उद्धृत नामों को जोड़ते हुए बताया कि कहीं उनका शंकर सुवन, तो कहीं पवन पुत्र-पवन तनय के रुप में परिचय मिलता है। कहीं उन्हे केसरी नंदन पुकारा जाता है। माता के रूप में आंजनेय-अंजनीसुत के रुप में जाना जाता है। वास्तव में हनुमान जी के माता पिता कौन है इसका उत्तर देना सरल नहीं है। युग तुलसी परम पूज्य महाराज श्री रामकिंकरजी ने अपनी आध्यात्मिक दृष्टि से श्री हनुमान जी का परिचय इन पौराणिक कथाओं के आधार पर प्रदान किया है। ज्ञानी, भक्त, कर्मयोगी, धार्मिक और शरणागतों की दृष्टि से श्री हनुमान जी कौन है इस मार्मिक प्रसंग पर दीदी मंदाकिनी ने सप्तदिवसीय कथा अनुष्ठान की शुक्रवार को शुरूआत की। मौसम में शीतलता के बावजूद काफी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे।

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