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 कोटा के बाद एक और अस्पताल में लापरवाही, अबतक 10 बच्चों की मौत

 
बूंदी 

कोटा में बच्चों के दम तोड़ने का सिलसिला जारी है. जे के लोन अस्पताल में मरने वाले बच्चों की संख्या 106 हो गई है. मौत के इतने बड़े आंकड़े के बाद इस अस्पताल पर सरकार की निगाहें तो गई हैं, लेकिन कोटा से ही सटे बूंदी के सरकारी अस्पताल में अभी भी बच्चे काल के गाल में समा रहे हैं. यहां एक महीने में 10 बच्चों की मौत हो चुकी है.

आंकड़े दबाए था अस्पताल प्रशासन
बच्चों की मौत के आंकड़ों को अस्पताल प्रशासन छुपाए बैठा था. बूंदी के सरकारी अस्पताल में बच्चों की मौत का खुलासा तब हुआ जब अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने अस्पताल का दौरा किया. शुक्रवार को जब कलेक्टर महोदय अस्पताल पहुंचे और रजिस्टर चेक किया तो मौतों की संख्या देखकर वे हैरान हो गए. पता चला कि पिछले एक महीने में 10 बच्चों की मौत हो चुकी है. ये सभी मौतें नियोनटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) में हुई है.

किसी का वजन कम, तो कोई संक्रमण का शिकार
इस मामले को लेकर चिकित्सा विभाग का कहना है कि सभी बच्चे ग्रामीण इलाके से यहां आए थे. ड्यूटी इंचार्ज हितेश सोनी ने बताया कि किसी बच्चे का वजन कम था तो किसी के मुंह में गंदा पानी चला गया था, तो किसी के मुंह में हुए संक्रमण के कारण मौत हुई. उन्होंने दावा किया कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से बच्चों की मौत नहीं हुई है.

कलेक्टर ने दिए निर्देश
अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है. साथ ही उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि अस्पताल में सफाई व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाए. साथ ही अस्पताल में किसी प्रकार का कोई संक्रमण नहीं हो इसका ध्यान रखने को कहा है. कलेक्टर ने कहा है कि बच्चों के इलाज में किसी भी हालत में लापरवाही नहीं बरती जाए.

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