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भारतीय मूल के शख्स ने लंदन पुलिस पर थूका, खुद को बताया कोरोना पॉजिटिव

 लंदन 
लंदन में भारतीय मूल के एक 23 वर्षीय शख्स को पुलिस के ऊपर थूकने और खुद को कोरोना पॉजिटिव का झूठा मरीज बताने के चलते 8 महीने जेल की सजा सुनाई गई है। दक्षिणी लंदन के क्रोएडोन निवासी करण सिंह को क्रोएडोन क्राउन अदालत में हुई सुनवाई के बाद आपातकालीन कर्मियों पर हमले, अभद्र व्यवहार और प्रतिबंधित मादक पदार्थ रखने समेत कई मामलों में दोषी करार दिया गया।

दरअसल, 14 मार्च को जब बिना वर्दी के पुलिस अधिकारी गश्त कर रहे थे तो उन्होंने सिंह को क्रोएडोन में कार में बैठे देखा। उन्होंने उसकी पहचान ड्राइविंग के अयोग्य करार दिए जा चुके व्यक्ति के रूप में की, लिहाजा वे कार के पास गए और उससे बात की। सिंह ने इस बात से इनकार कर दिया कि उसे अयोग्य करार दिया जा चुका है और कहा कि उसे उसका लाइसेंस वापस मिल गया है।

अधिकारी जब सिंह से बात कर रहे थे तो उन्हें उसके और कार के भीतर से भांग की दुर्गंध आई। इसके बाद जब अधिकारियों ने उससे दुर्गंध के बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह भांग का सेवन कर रहा है। इसके बाद उसे मादक पदार्थ रखने के आरोप में गिरफ्तार कर दक्षिण लंदन के एक पुलिस थाने ले जाया गया, जहां पूछताछ के दौरान उसने अधिकारियों से बदतमीजी की और लॉक अप में बंद होने से इनकार कर दिया। इस दौरान उसने एक अधिकारी के मुंह पर थूक दिया और उससे कहा कि वह कोरोना वायरस से संक्रमित है।
 
इसके बाद सिंह से लॉक अप के भीतर दोबारा पूछताछ की गई, जिसमें उसने अधिकारी के मुंह पर थूकने और कोरोना वायरस से संक्रमित होने का झूठ बोलने की बात स्वीकार की।
 
ब्रिटेन ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कर्मियों के परिवारों के लिए 60,000 पौंड की नई बीमा योजना पेश की। कोरोना वायरस संकट से निपटने में अपनी जान गंवाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के परिवारों को इस योजना का लाभ मिलेगा। देश में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 21,000 के पार जा चुकी है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने सोमवार को डाउनिंग स्ट्रीट (प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास) पर दैनिक प्रेसवार्ता में इस योजना की घोषणा की।

हैनकॉक ने कहा, ''कोई भी राशि किसी अपने की जान के नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती। सरकार शोकाकुल परिवारों की मदद के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, ''मुझे मेरी इस जिम्मेदारी का पूरी तरह एहसास है कि हमें उनके (स्वास्थ्य कर्मियों के) प्रियजन की देखभाल करनी है।'' हैनकॉक ने कहा कि सरकार के तौर पर वे अन्य पेशेवरों के बारे में भी सोच रहे हैं जो कोरोना वायरस संक्रमण के वक्त भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उनके पास इस तरह की कोई योजना नहीं है। सरकार इसकी जरूरत पर भी विचार कर रही है।

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