मध्य प्रदेश

ननि-नपा के नियम होंगे एक जैसे, शासन ने भूमि सुधार आयोग को नया एक्ट बनाने दी जिम्मेदारी

भोपाल
राज्य सरकार और प्रदेश में नगर निगमों और नगरपालिकाओं के नियमों में एकरूपता रखेगी। अब तक दोनों ही तरह के निकायों के मामले में अलग-अलग अधिनियम काम करते रहे हैं लेकिन निकायों के काम में एकरूपता को देखते हुए इनके नियम एक जैसे बनाने का निर्णय लिया गया है। शासन ने भूमि सुधार आयोग को निकायों के लिए अधिनियम बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है, जिसकी अनुशंसा के आधार पर विधानसभा में प्रस्ताव लाकर उसे लागू किया जाएगा।

राज्य भूमि सुधार आयोग प्रदेश में राजस्व संबंधी मामलों में सुधार के लिए अलग-अलग रिपोर्ट देने के बाद अब मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम 1956 और मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की समग्र समीक्षा कर एक नया अधिनियम बनाएगा। दोनों ही अधिनियमों का प्रावधान कर एक अधिनियम में उसे समाहित करने के लिए विधेयक का प्रस्ताव तैयार करने का काम अनुशंसा के साथ आयोग शासन के  लिए करेगा ताकि राज्य सरकार बदलते शहरीकरण के हिसाब से नए तरीके से प्रावधान लाकर उसे लागू कर सके।

राज्य शासन के निर्देश के बाद अब भूमि सुधार आयोग इस काम के लिए नगरीय निकाय विधि परामर्शी की नियुक्ति करने जा रहा है। नियुक्त किए जाने वाले अधिकारी को नगरीय प्रशासन का व्यवहारिक अनुभव और निगम व पालिका अधिनियमों की जानकारी होना जरूरी है। उसके लिए आईटी में दक्षता, रिसर्च और नीति विश्लेषण का अनुभव भी मांगा गया है।

नए अधिनियम बनाए जाने के बाद इस मामले में नगरीय निकायों की भूमिका शहर की जनसंख्या पर डिपेंड करेगी। चूंकि नगरपालिका अधिनियम के अंतर्गत ही नगर परिषदों की व्यवस्था भी संचालित है। इसलिए यह तय है कि नए अधिनियम के बनने के बाद नगर परिषद, नगरपालिका और नगर निगम में एक सी व्यवस्था लागू हो जाएगी और जनसंख्या के मापदंड इन निकायों को मिलने वाले शासन अनुदान और योजना विकास की रूपरेखा तय करेंगे।

शिवराज सरकार ने वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले राजस्व अधिनियमों में भारी बदलाव किए थे। ये बदलाव भूमि सुधार आयोग की अनुशंसा पर ही किए गए थे। इसमें आज के दौर में अनुपयोगी प्रावधानों को राजस्व पुस्तक परिपत्र से विलोपित करने की भी कार्यवाही की गई। अब ये नियम एक साल से लागू हैं। दूसरी ओर अभी जबकि 2023 के चुनाव में दो साल का वक्त है तो नगरीय विकास के लिए नए और एक से प्रावधान तय कर राज्य सरकार अधिनियम बनाएगी और चुनाव के वक्त उन नए प्रावधानों को जनता के बीच लेकर जाएगी।

शहरी क्षेत्र में सबसे अधिक दिक्कत अवैध कालोनियों की होती है जिसमें भूमि, भवन खरीदने के बाद सामान्य व्यक्ति सरकारी दाव पेंचों में उलझ जाता है और उसे निकाय की सुविधाएं मिलने में दिक्कत होती है। अब तो विद्युत कम्पनियों ने भी अवैध कालोनी में बिजली कनेक्शन देने से मनाही की है। ऐसे में जो अधिनियम बनाया जाएगा, उसमें छोटे कस्बों और बड़े शहरों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाएगा। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्र भूमि प्रबंधन व्यवस्था का भी अधिनियम में उल्लेख होगा। अभी स्थिति यह है कि छोटी नगरपालिकाओं और नगर परिषदों में जहां तहां जमीन खरीदकर अनाप शनाप बिक्री के लिए भू माफिया शहरीकरण को बिगाड़ने का काम भी करते हैं।

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