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केंद्र सरकार ने दिया जवाब- दो अलग कोरोना वैक्सीन को मिक्स करना कितना सही? 

नई दिल्ली
क्या कोरोना की दो वैक्सीन को मिक्स किया जाना चाहिए? इसको लेकर लगातार सवाल उठते रहते हैं। अब केंद्र सरकार की तरफ से इसको लेकर जवाब आ गया है। इसमें कहा गया है कि इस मामले में तस्वीर तब स्पष्ट होगी जब हमारे पास इससे जुड़ा और ज्यादा डाटा होगा। केंद्र सरकार में बायोटेक्नोलॉजी विभाग की सचिव रेणु स्वरूप ने यह बात कही। साथ ही उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में कोविड 19 वैक्सीन की मिक्सिंग पर कुछ स्टडीज शुरू की गई हैं। 

ज्यादा आंकड़े आने के बाद स्पष्ट होगी तस्वीर
रेणु स्वरूप ने बताया कि डीसीजीआई ने सीएमसी वेल्लोर को वैक्सीन की मिक्सिंग का ट्रायल शुरू करने की इजाजत दी है। इस बारे में कुछ स्टडीज भी शुरू की गई हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि हालांकि मामला और ज्यादा क्लियर तभी होगा जब इससे जुड़ा और साइंटिफिक आंकड़ा हमारे पास होगा। गौरतलब है कि ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने अगस्त में सीएमसी वेल्लोर का एक प्रस्ताव स्वीकार किया था। इसके मुताबिक को-वैक्सीन और कोवीशील्ड की एक-एक डोज को मिक्स करने संबंधी रिसर्च की बात थी। तब नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने कहा था कि इस संबंध में इजाजत दे दी गई है।

300 वॉलंटियर्स पर किया जा रहा है टेस्ट
इस स्टडी में करीब 300 वॉलंटियर्स शामिल हैं। इन सभी को को-वैक्सीन और कोवीशील्ड की मिक्स डोज लगाई जा रही है। इस रिसर्च का मकसद यह पता लगाना है कि अगर किसी व्यक्ति को कोरोना की दो अलग-अलग वैक्सीन की दो डोज दी जाए तो वह इस बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित होगा या नहीं। डीजीसीआई से जब इस रिसर्च की इजाजत मिली थी, उसी समय आईसीएमआर ने बताया था कि को-वैक्सीन और कोवीशील्ड को मिक्स करना, बेहतर परिणाम दे सकता है। गौरतलब है कि दुनियाभर में वैक्सीन के मिश्रण को लेकर लगातार रिसर्च चल रहा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में पाया गया है कि एस्ट्राजेनका और फाइजर बायोटेक की वैक्सीन का मिश्रण इस महामारी के खिलाफ बेहतर परिणाम दे रहा है।

आईसीएमआर पहले ही कर चुका है इस पर काम 
यहां इस बात का उल्लेख करना भी जरूरी है कि आईसीएमआर की स्टडी असल में एक गलती के आधार पर की गई थी। हुआ यूं था कि उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में 18 लोगों ने गलती से दोनों डोज अलग-अलग वैक्सीन की लगवा ली थी। इन्हें पहली डोज के तौर पर कोवीशील्ड लगाई गई थी। इसके 18 दिन बाद इन्हें दूसरी डोज लगी, लेकिन यह को-वैक्सीन की डोज थी। बाद में आईसीएमआर ने इन 18 लोगों पर स्टडी की थी। इसमें सामने आया था कि कोवीशील्ड और को-वैक्सीन के मिश्रण ने इम्यून सिस्टम को बेहतर बना दिया। इसमें यह भी बताया गया कि अगर एक ही वैक्सीन की दोनों डोज लगती है तब भी इतना बेहतर इम्यून सिस्टम नहीं बनता है। 
 

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