मध्य प्रदेश

बैच सीनियरिटी में उलझा दर्जनभर IPS का भविष्य

भोपाल

एक दिन बनाम एक महीने के फेर में प्रदेश के एक दर्जन से ज्यादा आईपीएस अफसरों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। इसमें यदि अफसरों को हाईकोर्ट से उनके मुताबित फैसला मिलता है तो अधिकांश की वर्दी पर भविष्य में आईजी रैंक तक का तमगा लग सकता है। इन अफसरों को 2007 या फिर 2008 बैच आईपीएस में चाहिए। यदि दो साल का लाभ इस बैच के अफसरों को मिला तो अधिकांश आईजी रैंक तक पहुंच जाएंगें। अब भविष्य में यह किस रेंक तक पहुंचते हैं, यह कोर्ट के फैसले पर अब निर्भर करेगा। इस मामले में जबलपुर हाईकोर्ट में 19 दिसंबर को सुनवाई होना है।

एक दिन के आधार पर पहुंचे कोर्ट
सूत्रों की मानी जाए तो वर्ष 2009 बैच के आईपीएस अफसर इसी बैच के कुछ अफसरों को दी गई एक दिन की छूट के आधार पर हाईकोर्ट में पहुंचे हैं। दरअसल वर्ष 1995 बैच के राज्य पुलिस सेवा के अफसरों ने अपनी नौकरी 2 जनवरी को ज्वाइन की थी, इसलिए जब आईपीएस का बैच अलॉट हुआ तो इन्हें एक दिन की छूट इसमें मिली। इधर अब इसी आधार पर वर्ष 1994 में राज्य पुलिस सेवा की नौकरी ज्वाइन करने वाले एक महीने की छूट चाह रहे हैं। यदि यह छूट मिली तो इन सब को आईपीएस का 2008 बैच आवंटित हो सकता है।

इसलिए चाहिए पूर्व का बैच
बताया जाता है इस बैच के अफसरों ने दो मांगे की है। पहली मांग तो यह है कि जिस तरह से वर्ष 1995 के एसपीएस अफसरों को आईपीएस बैच आवंटन में दी गई एक दिन की छूट के आधार पर उन्हें भी एक महीने की छूट दी जाए और उनकी सर्विस एक जनवरी 1994 से मानी जाए और उन्हें वर्ष 2008 बैच आवंटित किया जाए। वहीं दूसरी मांग यह भी कि पीएससी परीक्षा उनकी 1992 में हुई थी, इस आधार पर उन्हें वर्ष 2007 आवंटित किया जाए।

ये अफसर हैं इस बैच में
फॉरेसिंक साइंस लैब के डायरेक्टर शशिकांत शुक्ला, एआईजी पुलिस मुख्यालय संतोष  सिंह गौर, एसपी सीधी मुकेश श्रीवास्तव, कमांडेंट ओपी त्रिपाठी, विदिशा एसपी मोनिका शुक्ला, एआईजी एसटीएफ मनोज कुमार सिंह, एसपी कटनी सुनील कुमार जैन, एसपी राजगढ़ अवधेश गोस्वामी, डीसीपी इंदौर महेश चंद्र जैन, कमांडेंट सविता सोनवाने, कमांडेंट मनोज कुमार श्रीवास्तव, एसपी दमोह डीआर तेनीवार और कमांडेंट अनिता मालवीय की ज्वाइनिंग फरवरी 1994 की है।

यह है पूरा मामला
वर्ष 1994 में नौकरी ज्वाइन करने वाले पुलिस अफसरों की पीएससी की परीक्षा वर्ष 1991 में आयोजित होना थी, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के चलते उस दौरान इसे निरस्त कर दिया, बाद में यही परीक्षा 1992 में हुई। इसका परिणाम फरवरी 1993 में आया। इसके बाद सितंबर 1993 में इन सभी को 1994 फरवरी में ज्वाइन करने के आदेश दिए गए। जबकि इसी पीएससी से राज्य प्रशासनिक सेवा में आए अफसरों को सितंबर 1993 में ही नौकरी ज्वाइन करवा ली गई। एसपीएस अफसरों ने इस आदेश के बाद फरवरी 1994 में नौकरी ज्वाइन की। जबकि उन्हें सीनियरटी 1 जनवरी 1995 के अनुसार दी जा रही है। जबकि दो जनवरी 1995 को ज्वाइंन करने वालों की भी सीनियरटी भी 1 जनवरी 1995 में दी जा रही है।

 

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