राजनीति

कोलकाता के बाद मुंबई, चले दूर-दूर; केजरीवाल क्यों पहली बार ऐसा करने को मजबूर

नई दिल्ली

केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ लड़ाई का ऐलान करने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल विपक्षी दलों से समर्थन जुटाने की मुहिम पर निकल चुके हैं। मंगलवार को कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक अब मुंबई जा रहे हैं। वहां शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे से से समर्थन मांगेंगे। राज्यसभा में बिल का रास्ता रोकने की कोशिश में जुटे केजरीवाल को पहली बार केंद्र के खिलाफ लड़ाई में दूसरे दलों और नेताओं से मदद मांगते देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकार इसकी वजहें और मायने तलाशने में जुटे हुए हैं।

उद्धव से मुलाकात की पुष्टि करते हुए खुद केजरीवाल ने इसकी सूचना दी है। माना जा रहा था कि वह शरद पवार से भी मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि, केजरीवाल ने अपने ट्वीट में सिर्फ उद्धव से मुलाकात की बात कही है। उन्होंने लिखा, 'दिल्ली के लोगों को कल ममता दीदी का साथ मिला। जब मोदी सरकार संसद में दिल्ली के लोगों के खिलाफ बिल पेश करेगी, तो TMC पार्टी दिल्ली वालों के हक में उसका विरोध करेगी। दिल्ली के लोगों की ओर से मैं दीदी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं।  आज मुंबई में उद्धव जी से मुलाकात है।'

समर्थन मांगने की क्यों पड़ी जरूरत?
कई सालों तक सुप्रीम कोर्ट में अधिकार की लड़ाई लड़ने के बाद अरविंद केजरीवाल को जीत तो मिली लेकिन उनकी खुशी एक सप्ताह से अधिक टिक नहीं सकी। केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी कर दिया। दिल्ली के अफसरों पर नियंत्रण चाहने वाले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अब राज्यसभा में इस बिल का रास्ता रोकना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें विपक्षी दलों के समर्थन की आवश्यकता है। लोकसभा में केंद्र सरकार बिल को आसानी से पास करा लेगी। लेकिन राज्यसभा में एनडीए को अभी बहुमत हासिल नहीं है। केजरीवाल की कोशिश है कि विपक्षी दलों से समर्थन लेकर बिल को पास होने से रोका जाए।

 

Back to top button