व्यापार

सीतारमण ने अगले वित्त वर्ष में फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 5.1 प्रतिशत तक रहेगी


Deprecated: preg_split(): Passing null to parameter #3 ($limit) of type int is deprecated in /home/u104694628/domains/news20live.com/public_html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/post-functions.php on line 805

नई दिल्ली
 अंतरिम बजट में फिस्कल डेफिसिट, सरकारी उधारी और कैपिटल एक्सपेंडिचर के मोर्चे पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो बातें सामने रखी हैं, उनसे रुपये और इंफ्रास्ट्रक्चर को जरूरी सपोर्ट मिलने के साथ ब्याज दरों में कमी की राह भी बन सकती है। सीतारमण ने अगले वित्त वर्ष में फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 5.1 प्रतिशत तक रखने की बात की और कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 5.9 प्रतिशत के बजाय 5.8 पर रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि सरकारी उधारी मौजूदा के मुकाबले अगले वित्त वर्ष में कम होगी जिससे प्राइवेट इनवेस्टमेंट बढ़ाने में मदद मिलेगी।

मौजूदा वित्त वर्ष में 17 लाख 34 हजार 773 करोड़ रुपये के रिवाइज्ड एस्टिमेट के मुकाबले अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 16 लाख 85 हजार 494 करोड़ रुपये तक रखने का लक्ष्य दिया गया है। राजस्व के मिलने और खर्च के अंतर यानी फिस्कल डेफिसिट के इंतजाम के लिए सरकार बॉन्ड जारी कर बाजार से उधार लेती है। सीतारमण ने कहा, ‘2024-25 में ग्रॉस मार्केट बॉरोइंग्स 14.13 लाख करोड़ और नेट मार्केट बॉरोइंग्स 11.75 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। ये दोनों ही मौजूदा वित्त वर्ष से कम होंगी।'

आरबीआई के लिए आसानी
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के चीफ इकनॉमिस्ट डीके जोशी ने कहा, ‘जेपी मॉर्गन इंडेक्स में इंडिया बॉन्ड्स के शामिल होने के साथ ग्लोबल इकॉनमी के साथ हमारा इंटीग्रेशन बढ़ रहा है। हमारे फिस्कल एकाउंट्स पर दुनिया का ध्यान बढ़ रहा है। ऐसे में फिस्कल डेफिसिट घटाना अच्छी बात है। कम फिस्कल डेफिसिट वाला बजट होने से महंगाई बढ़ने का चांस भी घटता है। ऐसा बजट आरबीआई का काम आसान कर देता है। तीसरी बात यह है कि प्राइवेट सेक्टर ही नहीं, बल्कि सरकार के लिए भी उधार जुटाने की लागत घट जाती है। बॉन्ड यील्ड घटने से इसका पता चलता है।’ सरकार ने आरबीआई को जिम्मा दिया है कि महंगाई दर को 2 से 6 प्रतिशत के बीच रखा जाए। अभी रेपो रेट 6.5 प्रतिशत पर है। महंगाई घटने पर आरबीआई रेपो रेट घटा सकता है।

निवेशकों के लिए मौका
सक्षम वेल्थ प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर समीर रस्तोगी ने कहा, ‘फिस्कल डेफिसिट घटना मैक्रो फंडामेंटल्स के लिए अच्छी बात है। इससे रुपये को भी सपोर्ट मिलेगा। यह बॉन्ड मार्केट के लिए तो अच्छा है ही, आने वाले दिनों में इक्विटी मार्केट्स को भी इससे फायदा होगा। सरकारी उधारी कम होने से इंटरेस्ट रेट घटने का चांस बढ़ गया है। निवेशकों के लिए काम की बात यह है कि जब भी ब्याज दरें घटेंगी, लॉन्ग ड्यूरेशन बॉन्ड्स पर मार्क टु मार्केट फायदा हो सकता है। अनुमान यही है कि इंटरेस्ट रेट घटने पर सात-साढ़े सात पर्सेंट वाला 10 साल का सरकारी बॉन्ड अगले एक साल में आपको 12-13 पर्सेंट का मार्क टु मार्केट प्रॉफिट दे सकता है।‘

कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ने से क्या होगा?
वित्त मंत्री ने FY25 के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर 11 प्रतिशत बढ़ाकर 11.11 लाख करोड़ रुपये करने का ऐलान किया। हालांकि रिवाइज्ड एस्टिमेट के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष के लिए कैपेक्स 9.5 लाख करोड़ होगा, जो बजट एस्टिमेट से 50 हजार करोड़ रुपये कम है। बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा, ‘फिस्कल डेफिसिट का 5.1 पर्सेंट का टारगेट व्यावहारिक है। सरकार के पास जितनी राजकोषीय गुंजाइश है, उसमें से कैपेक्स के लिए पर्याप्त इंतजाम किया गया है। यह अडिशनल टोटल आउटले के करीब 40 प्रतिशत है। इंफ्रा पर खर्च बढ़ने से स्टील, सीमेंट और कैपिटल गुड्स इंडस्ट्रीज पर पॉजिटिव इफेक्ट दिखेगा। प्राइवेट सेक्टर इनवेस्टमेंट बढ़ाएगा। राज्यों को केंद्र से करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। इससे उनकी ओर से भी खर्च बढ़ने की संभावना है।’


Deprecated: preg_split(): Passing null to parameter #3 ($limit) of type int is deprecated in /home/u104694628/domains/news20live.com/public_html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/post-functions.php on line 805

Related Articles

Back to top button