जीएसटी टैक्सपेयर्स के सहूलियत के लिए भरा हुआ फार्म मिलेगा, आपके हर सवाल का यहां है जवाब

नई दिल्ली
देश में जीएसटी लागू हुए 5 साल हो गए हैं। इन सालों में टैक्स व्यवस्था सुधारने की कोशिशें तो हुई हैं लेकिन करदाताओं की समस्याएं खत्म नहीं हुई। अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड यानि सीबीआईसी के अध्यक्ष विवेक जौहरी ने हिन्दुस्तान के विशेष संवाददाता सौरभ शुक्ल से खास बातचीत में भरोसा दिलाया है कि करदाताओं की हर समस्या का निराकरण होगा। उन्होंने भविष्य में जीएसटी व्यवस्था में सुधार का वो रोडमैप भी बताया जिससे करदाताओं को सहूलियत होगी।
सवाल: करदाताओं को रोज नए आ रहे नियमों से मुश्किलें होती हैं। इससे कब छुटकारा मिलेगा?
जवाब: देखिए, पुरानी मुश्किल व्यवस्था को जीएसटी के जरिए एक किया गया है। जाहिर है पूरी तरह व्यवस्थित होने में समय लगेगा। एक दर्जन से ज्यादा रिटर्न घटाकर तीन तक सीमित किए हैं। भविष्य में तकनीक के सामंजस्य से ऐसी व्यवस्था ले आएंगे कि करदाता को सारी जानकारी पहले से ही अपने रिटर्न फॉर्म में भरी मिलेगी। वो केवल जानकारियों की पुष्टि करके ही रिटर्न फाइल कर पाएंगे। जीएसटी रिटर्न और संग्रह में इजाफा बताता है कि व्यापक तौर पर कारोबारियों ने इससे सामंजस्य बिठा लिया है। जिन कुछ लोगों को दिक्कत हो रही है उसका भी हम समाधान निकालेंगे।
सवाल: नई व्यवस्था से सामंजस्य न बिठा पाने के चलते करदाताओं पर पेनाल्टी का बोझ लाद दिया जाता है। इसे कैसे दूर करेंगे?
जवाब: वित्तवर्ष 2017-18 और 2018-19 के करीब 40 हजार रिटर्न का ऑडिट हो रहा है। इनमें जो गलतियां करोबारियों की तरफ से हुई होंगी उन्हें देखते हुए जरूरत पड़ी तो सिस्टम में सुधारा जाएगा। हम कारोबारियों को ऑनलाइन या ऑफलाइन जैसी जरूरत हुई ट्रेनिंग भी देंगे ताकि उन्हें जीएसटी व्यवस्था के साथ सामंजस्य बिठाने में दिक्कत न हो।
सवाल: आप पुराने मामलो पर कोई टैक्स डिमांड बनी तो उसकी वसूली कैसे होगी?
जवाब: इस मामले में जीएसटी कानून के दायरे में ही कारोबारियों से अगर कोई टैक्स बनता होगा तो वो लिया जाएगा। साथ ही उसी हिसाब से अगर किसी मामले में पेनाल्टी की जरूरत हुई तो उस पर विचार होगा।
सवाल: गैर ब्रांडेड चीजों पर जीएसटी से महंगाई नहीं बढ़ जाएगी?
जवाब: इसे समझने की जरूरत है। कई जगहों पर ऐसी शिकायतें मिलीं इसकी आड़ में कुछ उत्पादों पर लेबल होते हुए भी उस दायरे से बाहर थे। अब फैसला हुआ है कि जो भी उत्पाद फैक्ट्री से किसी नाम के लेबल के साथ एमआरपी और दूसरी जानकारी लिए हुए पैकेजिंग में आता है तो उस पर ये टैक्स लगेगा। कोई खुला उत्पाद अगर पैक करके ग्राहक को बेचा गया तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा।
सवाल: जीएसटी रजिस्ट्रेशन में लगने वाले लंबे समय से कब छुटकारा मिलेगा?
जवाब: पहले रजिस्ट्रेशन तीन दिन में हो जाता था, लेकिन समय के साथ-साथ इसमें भयंकर फर्जीवाड़ा देखा गया। लोग फर्जी बिल जारी कर जीएसटी रिफंड ले लेते थे। ऐसे में अब हमने इस प्रक्रिया को आधार के साथ जोड़ा है। साथ ही उनके प्रतिष्ठान का फिजिकल वेरिफिकेशन होगा। इस प्रक्रिया में समय लगेगा, लेकिन फर्जीवाड़े को रोकने के लिए ऐसा करना जरूरी है। अगर लोग आधार वैलिडेट करा देते हैं तो समय घटेगा।
सवाल: अपीलेंट अथॉरिटी के फैसलों से जीएसटी कानून की व्याख्या कई मौकों पर बदलती देखी जा रही है। कारोबारी किसी नियम पर चलते हुए अपना कारोबार करता है तब तक इन फैसलों से उस नियम की उलट व्याख्या आ जाती है। इस मुश्किल का हल कैसे निकाल रहे हैं?
जवाब: जीएसटी काउंसिल में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी और तय किया गया है कि जल्द ही देश में जीएसटी ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा जिससे इन अलग-अलग जगहों के इन फैसलों के आने से पैदा होने वाली विसंगतियों को दूर किया जा सकेगा। इस साल ट्रिब्यूनल वास्तविकता में आते दिख सकते हैं।
सवाल: करदाताओं और जीएसटी अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है?
जवाब: हमने इसके लिए केंद्र और राज्य जीएसटी अधिकारियों के बीच ट्रेनिंग का फैसला किया है। राजस्थान और पंजाब में ये पूरी हो गई है। अब बिहार, झारखंड, यूपी और उत्तराखंड जैसे राज्यों में जीएसटी से जुड़ी ट्रेनिंग अधिकारियों और कर्मचारियों को दी जाएगी जिससे न सिर्फ कारोबारियों को आसानी होगी बल्कि जीएसटी कलेक्शन भी प्रभावी होगा।



