मध्य प्रदेश

राज्य के गेहूं को उठाने में सेंट्रल की एजेंसी कर रही गड़बड़झाला

भोपाल
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। दरअसल राज्य सरकार द्वारा खरीदे गए गेहूं जो वेयरहाउसेस और सायलो में रखे हुए हैं, उनके उठाव को लेकर एफसीआई के अधिकारी तय प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं। प्रोटोकॉल के मुताबिक एफसीआई को मप्र से अन्य राज्यों में गेहूं परिवहन करने के लिए पहले उन वेयर हाउस और सायलो से वह गेहूं उठाना है जिसकी खरीदी सबसे पहले हुई है। इसके उलट वे रेलवे ट्रेक और परिवहन की सुगमता का हवाला देते हुए 2021-22 में खरीदे गए गेहूं का उठाव कर रहे हैं, जबकि वेयर हाउस और सायलो में 2019 से गेहूं का भंडारण है।

राज्य सरकार के अफसरों ने दर्ज कराई आपत्ति
गोदामों से गेहूं का उठाव करने के मामले में एफसीआई की भूमिका पर नियमों की अनदेखी के भी आरोप लग रहे हैं। राज्य सरकार के अफसरों ने भी एफसीआई के गेहूं उठाव की प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई है। राज्य सरकार के अफसरों ने एफसीआई से तय प्रोटोकॉल के अनुसार गेहूं उठाव करने पर जोर दिया है। अफसरों का कहना है कि पहले पुराने गेहूं का उठाव कर दूसरे राज्यों में भेजा जाना चाहिए। इसके बाद ही छह माह या एक साल पहले खरीदे गए गेहूं को ले जाना चाहिए। इससे नए वेयर हाउसेस का सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है जिन्होंने हाल ही में निर्माण किया है।

सेंट्रल पूल को देना है 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं
मध्यप्रदेश के गोदामों में रखा सरकारी खरीद का गेहूं गोदामों से तेजी से खाली हो रहा है। इसकी वजह प्रदेश में चालू वित्त वर्ष में गेहूं का कम उपार्जन और दूसरे राज्यों में गेहूं की अत्यधिक सप्लाई के चलते उसकी आपूर्ति के लिए एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) द्वारा गेहूं का तेजी से किया जा रहा परिवहन है। राज्य सरकार ने एफसीआई से 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन करने का लक्ष्य तय किया था लेकिन इस साल बाजार में गेहूं बिकने से 45 लाख मीट्रिक टन गेहूं का ही उपार्जन हो सका है। ऐसे में गोदामों में रखा पुराना गेहूं तेजी से खाली हो रहा है। इस बीच पूरे मामले में एफसीआई की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

बारिश के बहाने सायलो का गेहूं रोका
प्रदेश के विभिन्न जिलों में सायलो बैग में लाखों मीट्रिक टन गेहूं सायलो में रखा है। इसमें एक साथ 250 मीट्रिक टन गेहूं रखा होता है। ऐसे में इस गेहूं का एक साथ उठाव करने की स्थिति न होने पर बाकी गेहूं बारिश और नमी के कारण खराब होने की स्थिति बनती है। इसलिए इस गेहूं को फिलहाल उठाव से मुक्त रखा गया है।

नए गेहूं के गोदाम खाली किए जाने पर उठ रहे सवाल
गोदामों में एकत्र गेहूं का उठाव कर देश के दूसरे राज्यों में भेजने के लिए तय एजेंसी एफसीआई के अफसरों पर अब आरोप लग रहे हैं। गोदामों में जमा नया गेहूं तेजी से उठाया जा रहा है और उसे सेंट्रल पूल के जरिए अन्य राज्यों को भेजा जा रहा है। इसके चलते जहां एक ओर नए गेहूं के गोदाम खाली हो रहे हैं वहीं तीन साल पुराना तक गेहूं अभी भी गोदामों में भरा हुआ है। जबकि प्रक्रिया के अनुसार सबसे पहले पुराने गेहूं को पीडीएस सिस्टम में पब्लिक तक पहुंचाने का प्रावधान है लेकिन इस दिशा निर्देश का पालन न होने के कारण एक तरफ तो अधिक किराया दिए जाने का नुकसान हो रहा है, वहीं पुराने गेहूं के खराब होने का भी खतरा बरकरार रहता है।

 

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