मध्य प्रदेश

सार्वजानिक वितरण प्रणाली में बदलाव, 60% हितग्राहियों को गेहूं के बजाय चावल दे रही सरकार

भोपाल
भारत सरकार द्वारा विदेशों में निर्यात किए गए गेहूं का असर राज्यों में बंटने वाले गेहूं के आवंटन पर पड़ा है। इसका असर यह हुआ है कि देश के अन्य राज्यों के साथ मध्यप्रदेश में भी अब पांच करोड़ हितग्राहियों को गेहूं की बजाय चावल राशन दुकानों से दिया जा रहा है। पूर्व में तय आवंटन के मुताबिक प्रदेश के सवा करोड़ हितग्राहियों को चावल मिलता था, जबकि नई व्यवस्था में चावल का कोटा तीन करोड़ हितग्राहियों के लिए कर दिया। ऐसे में हितग्राहियों की डिमांड पर भी गेहूं नहीं मिल पा रहा है। इससे चावल की बजाय गेहूं की रोटी खाने वाले परिवारों को दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह पिछले रबी सीजन में गेहूं का उपार्जन कम होना भी बताया जा रहा है।

प्रदेश में गर्मी के महीने में रबी सीजन का गेहूं आने पर खरीदी केंद्र में समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए राज्य सरकार ने एफसीआई से 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन करने का लक्ष्य तय किया था लेकिन बाजार में अच्छा रेट मिलने के चलते किसानों ने व्यापारियों को गेहूं बेच दिया। इस स्थिति में चालू साल में 45 लाख मीट्रिक टन गेहूं का ही उपार्जन हो सका है। इसके साथ ही एमपी का गेहूं केंद्र सरकार के निर्देश पर दूसरे राज्यों को भेजा जा रहा है। इसलिए भी यहां गेहूं का भंडारण कम हो रहा है और इसका सीधा असर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन व प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में किए जाने वाले मुफ्त राशन वितरण पर पड़ रहा है। इसके चलते राशन दुकानों में गेहूं की डिमांड के बाद भी हितग्राहियों को गेहूं नहीं मिल पा रहा है। बताया जाता है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत 2.75 लाख मीट्रिक टन गेहूं और चावल का वितरण किया जाता है जबकि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत 2.50 लाख मीट्रिक टन गेहूं दिया जाता है।

जिलों में इतना वितरित हो रहा गेहूं व चावल
केंद्र सरकार की नई आवंटन नीति के अंतर्गत वर्तमान में प्रदेश के जिलों में 3 लाख 55 798 मीट्रिक टन चावल और एक लाख 73 हजार 94 मीट्रिक टन गेहूं वितरित किया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत अन्त्योदय हितग्राहियों को 35 किलो चावल व गेहूं आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। इसी तरह प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को प्रति व्यक्ति पांच किलो गेहूं व चावल देने का प्रावधान किया गया है। कई जिलों में इन दिनों सिर्फ चावल ही मिल रहा है, गेहूं दिया ही नहीं जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि कई जिलों में तो गेहूं के स्थान पर हर माह चावल मिलने से परेशान हितग्राहियों ने कलेक्टर की जनसुनवाई और राज्य शासन से भी शिकायत की है लेकिन भारत सरकार की ओर से कोटा तय किए जाने के चलते उनकी सुनवाई नहीं हो रही है और प्रशासन जो राशन उपलब्ध हो रहा है, वही वितरित कर विवाद से किनारा कर रहा है।

अब मिल रहा सिर्फ 40% गेहूं, 35% कम हुई सप्लाई
प्रदेश में पांच करोड़ 9 लाख हितग्राही हैं जिन्हें केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के अंतर्गत गेहूं और चावल दिए जा रहे थे। इस व्यवस्था के अंतर्गत भारत सरकार ने पूर्व में गेहूं और चावल वितरण का जो अनुपात तय किया था, उसके अनुसार 75 प्रतिशत गेहूं का वितरण होना था और 25 प्रतिशत चावल हितग्राहियों को दिया जाना था। नए निर्देश के मुताबिक स्थिति एकदम उलट हो गई है। अब वितरित किए जाने वाले गेहूं और चावल का अनुपात 40:60 कर दिया गया है यानी 25 प्रतिशत दिया जाने वाला चावल अब 60 प्रतिशत वितरित किया जा रहा है वहीं 75 फीसदी वितरित होने वाला गेहूं 40 फीसदी वितरित किया जाना है।

जो मात्रा उसके अनुसार भी नहीं हो रहा वितरण
जिलों से मिल रही जानकारी के अनुसार भारत सरकार ने नई व्यवस्था में गेहूं और चावल के वितरण का अनुपात 40:60 कर दिया है पर 40 फीसदी गेहूं भी राशन दुकानों से बंट नहीं रहा है। हितग्राहियों को महीने भर के लिए सिर्फ चावल ही वितरित किया जा रहा है। ऐसे में गेहूं की कमी को लेकर हितग्राहियों में नाराजगी भी है क्योंकि जिन जिलों में जिन विकासखंडों में लोग चावल नहीं खाते हैं, उन्हें सिर्फ चावल दिया जा रहा है। हालांकि खाद्य विभाग के अफसरों का कहना है कि जिन इलाकों में लोग ज्यादा चावल खाते हैं, उन्हीं क्षेत्रों में ही चावल की मात्रा ज्यादा बढ़ाई गई है। गेहूं का प्रदाय भी किए जाने की बात अधिकारियों द्वारा कही जा रही है।

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