बड़े नेता आपस में न ‘टकरात’ तो भाजपा 3 से 5 जिलों में बना सकती थी अपने जिला पंचायत अध्यक्ष

भोपाल
प्रदेश में हुए जिला पंचायत और जनपद पंचायत अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस के मुकाबले भारी बहुमत पाया है लेकिन इन चुनावों में भाजपा के बड़े नेताओं और जिले के नेताओं का एक दूसरे को पटखनी देने के लिए किसी भी हद तक जाना और विरोधी की मदद करने की रणनीति भी खुलकर सामने आ गई है। इसका असर यह हुआ कि भाजपा जो 3 से 5 जिलों में अपने जिला पंचायत अध्यक्ष और बना सकती थी, वो नहीं बना पाई। पार्टी के बड़े नेता, विधायक और मंत्रियों ने अपने परिजनों और चहेतों को अध्यक्ष की कुर्सी पर बिठाने के लिए पार्टी लाइन से बाहर जाकर काम किया जिसका खामियाजा भाजपा को उठाना पड़ा। अब देखना यह है कि पार्टी संगठन ऐसे नेताओं पर क्या कार्रवाई करता है, ताकि उनको उनकी गलती का अहसास हो सके।
छिंदवाड़ा में अपनों से धोखा खा गई भाजपा
छिंदवाड़ा जिले में 11 में से छह जनपदों में जीत हासिल करने में सफल भाजपा को उम्मीद थी कि जिला पंचायत में भी पार्टी का परचम फहराएगा लेकिन यहां से आरएसएस में सालों तक अपनी सेवा देने वाले संजय पुनार ने दो दिन पहले कांग्रेस का दामन थाम लिया और भाजपा के हाथ से जीत निकल गई। इस हार को भाजपा के स्थानीय नेता पचा नहीं पा रहे हैं।
बड़वानी में मंत्री और पूर्व मंत्री के परिजन भिड़े
बड़वानी में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा के विधायक और पूर्व मंत्री आपस में भिड़ गए। पार्टी ने पूर्व मंत्री अंतर सिंह आर्य की बहू कविता आर्य को प्रत्याशी बनाया था लेकिन मंत्री प्रेम सिंह पटेल के बेटे बलवंत ने बागी बनकर पर्चा भर दिया और भाजपा को ही पटखनी दे दी। इसके बाद भाजपा में हार को लेकर जिला कार्यालय में जमकर गदर हुआ है और अब बलवंत पर कार्यवाही की मांग की जा रही है। हालांकि संगठन बलवंत की जीत को पार्टी की ही जीत बता रहा है।
बहुमत होने के बावजूद भाजपा के हाथ से निकला नर्मदापुरम
इधर, नर्मदापुरम जिले में 15 जिला पंचायत सदस्यों में से भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों का बहुमत था। उनकी संख्या 10 थी, वहीं कांग्रेस के 5 सदस्य थे। बावजूद इसके भाजपा यहां अपना अध्यक्ष बनवा पाने में सफल नहीं हो सकी। कांग्रेस नेता समीर शर्मा की कुशल रणनीति यहां काम आई और उन्होंने कांग्रेस की राधा सुधीर पटेल को अध्यक्ष बनवा लिया। उपाध्यक्ष पद पर भाजपा के मनोहर बैंकर निर्विरोध निर्वाचित हुए।
सिंगरौली में मेयर के बाद जिपं अध्यक्ष भी खोया
भाजपा ने सिंगरौली में महापौर का पद गंवाने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष का पद भी खो दिया। इसके बाद बीजेपी में यह चर्चा है कि यहां पार्टी के लोगों ने ही बीजेपी समर्थित को हरा दिया। यहां से कांग्रेस समर्थित पूर्व सांसद तिलकराज सिंह की बेटी सोनम सिंह जीतने में कामयाब रही है।
दमोह, डिंडोरी और अनूपपुर में मंत्रियों की साख काम न आई
दमोह और अनूपपुर जिला पंचायत अध्यक्ष के पद को लेकर भी भाजपा नेताओं की खींचतान के कारण दोनों जिलों से पार्टी को नुकसान हुआ। दमोह में जयंत मलैया और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल के बीच खींचतान के कारण पार्टी हारी तो डिंडौरी में केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते और ओमप्रकाश धुर्वे की खींचतान के कारण भाजपा यहां जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव नहीं जीत सकी। अनूपपुर में मंत्री बिसाहूलाल जिला पंचायत सदस्यों को मैनेज नहीं कर सके। इसी तरह उमरिया में भी भाजपा हारते-हारते जीती है।
इस हद तक गुटबाजी, रीवा जनपद में भाजपा के दो विधायक सरेआम आपस में भिड़े
रीवा जिले के सिरमौर विधानसभा क्षेत्र में जनपद अध्यक्ष के पद को लेकर भाजपा के ही सेमरिया विधायक केपी त्रिपाठी और सिरमौर एमएलए दिव्यराज सिंह आमने सामने आ गए थे। यहां दिव्यराज ने भाजपा समर्थित जनपद सदस्य के लिए लॉबिंग कर कांग्रेस को साध लिया था लेकिन विधायक त्रिपाठी अपने समर्थक को लड़ाने पर उतारू हो गए और इससे विवाद की स्थिति बन गई। दोनों विधायकों द्वारा एक दूसरे को पटखनी देने की कोशिश के बाद भी सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह अपनी समर्थक को जिताने में कामयाब रहे।
सीधी जनपद में भाजपा विधायक के विरोध में था संगठन, एक वोट से हुई जीत
जनपद पंचायत अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव के दूसरे चरण में जिला मुख्यालय की जनपद पंचायत सीधी में भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र सिंह परिहार अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं। उन्हें 25 में से 13 वोट मिले। पराजित संयुक्त उम्मीदवार दिव्या-दाधीच सिंह चौहान को 12 मत मिले। उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस समर्थित सुमन सिंह पटेल निर्वाचित घोषित की गई। परिहार को सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ल का समर्थन प्राप्त था। यहां अन्य भाजपा नेता और संगठन के पदाधिकारी धर्मेंद्र सिंह के विरोध में रहे। हालांकि एक वोट से मिली जीत ने भाजपा की नाक बचा ली।



