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तुर्किये गई उत्तराखंड की मेजर बेटी डॉ. बीना तिवारी ने जीता दिल, इस बात पर हो रही जमकर तारीफ

नई दिल्ली

तुर्किये में भूकंप के बाद भारत सरकार के मददगार अभियान ‘ऑपरेशन दोस्त’ में सक्रियता से जुटीं 28 वर्षीय मेजर डॉ. बीना तिवारी चर्चाओं में आ गईं हैं। वह भूकंप पीड़ित एक महिला को गले लगा रही हैं। उनका यह फोटो खूब वायरल हो रहा है। उत्तराखंड के देहरादून के राघव विहार में रहने वाली बीना तिवारी अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी की फौजी अफसर हैं।

उनके दादा खिलानंद तिवारी कुमाऊं रेजीमेंट में सूबेदार और पिता 16 कुमाऊं रेजीमेंट से रिटायर्ड सूबेदार मेजर मोहन चंद्र तिवारी हैं। तुर्किये में विनाशकारी भूंकप के प्रभावितों की मदद के लिए भारत से भेजे गए दल में डॉ.बीना तिवारी बतौर डॉक्टर शामिल हैं। 16 पैराफील्ड रेजीमेंट के हॉस्पिटल की मेजर डॉ.बीना तिवारी ने दिल्ली के आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस से एमबीबीएस किया है।
 
एक वीडियो में डॉ.बीना तिवारी 13 साल की लड़की नसरीन व उनकी मां का इलाज कर रही हैं। नसरीन ने इस आपदा में अपने परिवार के तीन सदस्यों को खोया है। नसरीन को 72 घंटे बाद मलबे से निकाला गया है, उनके पैर फ्रैक्चर है।  डॉ.बीना तिवारी ने बताया कि भले ही उनकी भाषा अलग है।

लेकिन इस समय भावनात्मक रूप से उनकी पूरी टीम आपदा पीड़ितों से जुड़ी है। दून में मौजूद उनके पिता मोहन चंद्र तिवारी ने बताया कि बीना ने दसवीं तक की पढ़ाई आर्मी पब्लिक स्कूल क्लेमनटाउन से की है। मोहन तिवारी मूल रूप से चम्पावत लोहाघाट के सुई खेंस कांडे गांव के निवासी हैं।

 

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