हाईटेक जापान की हकीकत: तकनीक भले आगे, लेकिन गरीबी में जी रहे लोग

टोक्यो
यह खबर तो आपको भी पता चल गई होगी कि जापान में संपन्न हुए हालिया चुनाव में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता सनाए तकाची ने 75.7 फीसदी सीटों पर कब्जा जमाकर जीत हासिल की है. यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद किसी भी जापानी नेता को मिला सबसे बड़ा समर्थन है. इस चुनाव ने न सिर्फ जापान की सत्ता को ग्लोबल चर्चा का विषय बना दिया, बल्कि दुनिया के सामने जापान की ऐसी तस्वीर भी पेश की जिसके बारे में ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं है. हमें आपको यही लगता होगा कि विकसित देशों की सूची में शामिल जापान आर्थिक प्रगति का रोल मॉडल है, लेकिन इस बार के चुनाव में की गई घोषणाओं ने जापान की पिछड़ी तस्वीर भी दुनिया के सामने रखी.
दूसरा विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद जापान साल 1960 से 1980 के बीच इकनॉमिक सुपरपॉवर बनकर उभरा. 90 के दशक तक जापान की जीडीपी ग्रोथ जी-7 में शामिल अन्य देशों के मुकाबले काफी तेज रही थी. इसके बाद से ही जापान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने लगा और आज तो यह भयंकर आर्थिक संकट में घिर चुका है. 60 से 70 और 70 से 80 के दशक में जापान की जीडीपी ग्रोथ 16.4 फीसदी और 17.9 फीसदी रही थी. साल 2010 से 2024 तक जापान की जीडीपी ग्रोथ शून्य से भी 2.4 फीसदी नीचे रही यानी फिलहाल वहां मंदी चल रही है.
दुनिया में सबसे ज्यादा सरकारी कर्ज
जापान इस समय आगे कुआं और पीछे खाई वाली स्थिति में है. एक तो उसकी जीडीपी ग्रोथ माइनस में चल रही है, जबकि सरकारी कर्ज जीडीपी के मुकाबले 230 फीसदी पहुंच गया है. यह दशकों से चले आ रहे घाटे वाले खर्चों का नतीजा है. जापान की नई प्रधानमंत्री सनाए तकाची ने अपने चुनावी वादों में अतिरिक्त खर्चों को घटाने और टैक्स कम करने का ऐलान किया था. इसके बाद से ही जापान के बॉन्ड मार्केट में हलचल बढ़ गई है. फिलहाल बॉन्ड यील्ड 3.56 फीसदी के साथ रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया है. इसे जापान के लिए डेट क्राइसिस की शुरुआत माना जा रहा है, जो ग्लोबल इकनॉमी के लिए जोखिम पैदा कर सकता है.
कमजोर मुद्रा बन रही परेशानी
जापान की मुद्रा येन भी लगातार कमजोर हो रही है, जो फिलहाल डॉलर के मुकाबले कई साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है. जापान ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है, जिससे आयात महंगा हो रहा है और महंगाई भी बढ़ रही है. अमेरिका के साथ टैरिफ वॉर की वजह से निर्यात में कमी आ रही और निवेश भी कमजोर पड़ा है. फिलहाल सबकुछ बैंक ऑफ जापान पर निर्भर करता है, जो आने वाले समय के लिए नीतियां निर्धारित करेगा और जापान को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है.
गरीबों के लिए चुनावी वादे
प्रधानमंत्री सनाए तकाची ने चुनावी वादों में गरीबों और निम्न आय वर्ग के लिए कई घोषणाएं की हैं. उनका कदम महंगाई से निपटने और स्थिर मजदूरी और बढ़ते खर्च से निपटने के लिए है. इस कड़ी में पीएम ने खाद्य उत्पादों पर 8 फीसदी का कंजप्शन टैक्स भी दो साल के लिए खत्म कर दिया है. इससे गरीब परिवारों के लिए भोजन की लागत कम होगी और उनके जीवन यापन में सुधार आएगा. साथ ही टैक्स छूट का दायरा भी बढ़ाए जाने की तैयारी है, ताकि निम्न आय वर्ग वालों की बचत को बढ़ाया जा सके.



