मध्य प्रदेश

पांढुर्णा में तैयार हुआ हनुमान लोक, मोहन यादव करेंगे लोकार्पण, कहीं और नहीं ऐसी प्रतिमा

पांढुर्णा
 आस्था के बड़े केंद्र जामसांवली हनुमानजी लोक के लोकार्पण की बारी आ गई है. मध्य प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव 26 मार्च को हनुमान लोक का लोकार्पण करेंगे. उज्जैन में महाकाल लोक की तर्ज पर हनुमान लोक का भी विस्तार किया जा रहा है. जिसके चलते अलग-अलग फेज में काम होने हैं. तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हनुमान लोक बनाने की घोषणा की थी.

314 करोड़ की लागत से 30 एकड़ में बन रहा है हनुमान लोक
मंदिर समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने बताया कि "करीब 30 एकड़ में बन रहे हनुमान लोक के पहले फेज का काम पूरा हो गया है. पहले फेज में करीब 35 करोड़ की लागत से यहां चिरंजीवी पथ, श्रद्धालुओं व पर्यटकों के बैठने की व्यवस्था, फूड कोर्ट, हनुमानजी की बाल लीलाओं को प्रदर्शित करती प्रतिमाएं, महाराष्ट्रीयन संस्कृति को दर्शाता स्वागत द्वार और परिसर में लाइटिंग की व्यवस्था की गई है.

दूसरे फेज में होगा गर्भ गृह का निर्माण 
हनुमान लोक के सेकंड फेज का काम अभी बाकी है. बताया जा रहा है कि हनुमान लोक प्रोजेक्ट का निर्माण 10 साल में पूरा होना है. जिसके तहत अभी पहले फेज का काम पूरा हुआ है. सेकंड फेज का निर्माण अभी बाकी है. सेकंड फेज के लिए भी शासन द्वारा दो भागों में फंड दिया जाना है. सेकंड फेज में मंदिर से लगे नाले का संरक्षण व सौंदर्यीकरण, चिरंजीवी पथ का निर्माण होना है. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और आस्था को देखते हुए एमपी शासन द्वारा मंदिर परिसर में सुविधाओं का विस्तार करते हुए 'हनुमान लोक' का निर्माण किया जा रहा है.

जिसे उज्जैन के 'महाकाल लोक' की तर्ज पर भव्य रूप दिया जा रहा है. मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा लगभग 30 एकड़ क्षेत्र में बनाए जा रहे इस भव्य 'हनुमान लोक' परियोजना पर 314 करोड़ रुपए की लागत आएगी."

दूसरे फेज में होगा गर्भ गृह का निर्माण
हनुमान लोक के दूसरे चरण में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा. जिसमें भक्ति सागर एवं प्रवचन हॉल का निर्माण, यज्ञशाला का निर्माण, दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग का निर्माण, संस्कृत महाविद्यालय का निर्माण, भोजशाला का निर्माण, धर्मशाला का निर्माण, चिकित्सा केंद्र की स्थापना, अष्ट सिद्धि केंद्र का निर्माण, ओपन एयर थिएटर का निर्माण, वाटर फ्रंट पाथवे का निर्माण, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की स्थापना, शेष बचे पाथ वे का निर्माण एवं परिसर का सौंदर्यीकरण का कार्य शामिल है.

श्री हनुमान लोक परियोजना के दूसरे चरण में श्री मूर्ति गर्भगृह का निर्माण भी प्रस्तावित है, जो मंदिर की पारंपरिक आस्था और आधुनिक सुविधा दोनों का समन्वय होगा. मंदिर न्यास द्वारा इस गर्भगृह की डिजाइनिंग और योजना तैयार की जा रही है. यह निर्माण कार्य श्रद्धालुओं को करीब से दिव्य दर्शन की अनुभूति देगा.

ऐतिहासिक मान्यताएं और रहस्य
मंदिर के पुजारी कमलेश तिवारी ने बताया कि "इस स्थान पर हनुमानजी की श्रीमूर्ति स्वयंभू प्रकट हुई थी. इस तरह की लेटी हुई और ऊर्ध्वमुखी प्रतिमा पूरे भारतवर्ष में कहीं और देखने को नहीं मिलती है, जो इसे अत्यंत विशिष्ट बनाती है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्रारंभ में हनुमानजी की प्रतिमा खड़ी अवस्था में थी. वर्षों पूर्व कुछ चोरों ने प्रतिमा के नीचे खजाना छिपे होने की अफवाह के कारण इसे हटाने का प्रयास किया.

इस दौरान मूर्ति अपने स्थान से हिली नहीं, बल्कि अपने-आप विश्राम अवस्था में लेट गई. कई प्रयासों के बावजूद मूर्ति को हिलाया नहीं जा सका, यहां तक कि 20 बैलों की सहायता से भी मूर्ति को टस से मस नहीं किया जा सका. मंदिर के इतिहास के बारे में कोई प्रमाणिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, लेकिन लगभग 100 वर्ष पहले के राजस्व अभिलेखों में यहां हनुमान जी की उपस्थिति का उल्लेख मिलता है. कुछ लोगों का मानना है कि भगवान श्रीराम इस स्थान पर पीपल के पेड़ के रूप में विराजमान हैं, जबकि हनुमान जी उनके चरणों में लेटे हुए हैं."

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