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ईरान ने चीनी सैटेलाइट की मदद से अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों से हमला किया, रिपोर्ट से मचा हलचल

तेहरान 
ईरान ने चीन के जासूसी सैटेलाइट का इस्तेमाल करते हुए मिडल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों की रेकी की थी। इसी के चलते उसे पूरी जानकारी मिल गई थी और फिर जंग में उसने चुन-चुनकर अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। चीनी सैटेलाइनट का यह इस्तेमाल 2024 के आखिरी दिनों में किया गया था। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने TEE-01B सैटेलाइट्स का इस्तेमाल किया था। इन्हें चीन की कंपनी 'अर्थ आई' ने तैयार किया है। इनकी सेवाओं को ईरानी सेना की एयरोस्पेस फोर्स ने खरीदा था। चीन की ओर से इन सैटेलाइट्स को लॉन्च करने के कुछ दिन बाद ही ईरान ने सेवाएं ली थीं।

इस बीच चीनी विदेश मंत्रालय ने ऐसी रिपोर्ट्स को खारिज किया है। उसका कहना है कि चीन पर टैरिफ लगाने के लिए ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं। इन मनगढ़ंत आरोपों का इस्तेमाल हमारे ऊपर टैरिफ लगाने के बहाने के तौर पर किया जा सकता है। चीनी मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि यदि अमेरिका ने हमारे ऊपर टैरिफ बढ़ाया तो फिर हम भी उसका जवाब देंगे। फाइनेंशियल टाइम्स ने लिखा है कि उसने ईरानी सेना के लीक दस्तावेजों के अध्ययन के बाद यह जानकारी दी है। अखबार का कहना है कि ईरानी सेना के कमांडरों ने सैटेलाइट से कहा था कि वह अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों की मॉनिटरिंग करे। इसके बाद सैटेलाइट की मदद से तस्वीरें और अन्य जानकारियां हासिल की गईं।

इन तस्वीरों को काफी पहले ही जुटाया गया था। इसके बाद जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए तो उसने भी जवाबी हमले किए। ईरान ने इराक, कतर, सऊदी अरब समेत कई देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। जानकारी यह भी है कि चीनी सैटेलाइट्स की रेंज में एशिया का ज्यादातर हिस्सा आता है। इसके अलावा लैटिन अमेरिका समेत कई और क्षेत्र उसकी जद में हैं।
'ट्रंप भी कह चुके मेरा इरादा चीन को टारगेट करना'

बता दें कि चीन पर डोनाल्ड ट्रंप खुद ही आरोप लगा चुके हैं कि उसने ईरान को हथियारों के जरिए मदद की है। उनका कहना था कि मैंने कुछ देशों पर 50 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की जो बात कही है, वह मुख्य रूप से चीन के लिए ही है। गौरतलब है कि मई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद चीन जाने वाले हैं। माना यह भी जा रहा है कि शायद अपने दौरे से पहले एक बेहतर डील के लिए चीन पर दबाव डालने की भी उनकी यह रणनीति हो सकती है।

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