बिहार

बिहार में सहायक प्राध्यापक बनेंगे प्रोफेसर, नई नियमावली से खुला रास्ता

पटना
प्रदेश में संचालित संबद्ध घाटानुदानित और धार्मिक अल्पसंख्यक महाविद्यालयों के सहायक प्राध्यापक भी प्रोफेसर बनेंगे। इससे संबंधित करियर एडवांसमेंट स्कीम नियमावली, 2026 को राज्यपाल और कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने स्वीकृति प्रदान कर दी।

इससे संबद्ध घाटानुदानित व धार्मिक अल्पसंख्यक महाविद्यालयों के सहायक प्राध्यापकों की लंबित प्रोन्नति का रास्ता साफ हो गया है। यह नियमावली तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

इसके तहत सहायक प्राध्यापकों को करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रोन्नति का लाभ उसी तरह मिलेगा जिस तरह अंगीभूत महाविद्यालयों के सहायक प्राध्यापकों को मिल रहा है। नियमावली से संबद्ध घाटानुदानित और धार्मिक अल्पसंख्यक महाविद्यालयों के सहायक प्राध्यापक अब एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर के पदों पर प्रोन्नत होंगे।

राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना के मुताबिक इससे राज्य के हजारों सहायक प्राध्यापकों को लाभ मिलेगा। नियमावली के अनुसार अब सहायक प्राध्यापक अपने कार्य निष्पादन और शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर के पद पर प्रोन्नत हो सकेंगे।

इसके लिए शिक्षण एवं शोध कार्य, शोध पत्रों का प्रकाशन, रिफ्रेशर और ओरिएंटेशन जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अनिवार्य भागीदारी और अन्य शैक्षणिक मानकों को पूरा करना होगा। प्रोन्नति की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए स्क्रीनिंग और चयन समितियों का गठन किया जाएगा, जिनमें कुलपति, विषय विशेषज्ञ और सरकार के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

शिक्षण कार्य के मूल्यांकन में 80 प्रतिशत कक्षाएं लेने पर अच्छा ग्रेड अनिवार्य
नियमावली में यह प्रविधान किया गया है कि शिक्षण कार्य के मूल्यांकन में कम-से-कम 80 प्रतिशत कक्षाएं लेने पर अच्छा ग्रेड अनिवार्य होगा। नियमावली में उन सहायक प्राध्यापकों को भी राहत दी गई है, जिनकी प्रोन्नति 18 जुलाई, 2018 से पहले नियमावली के अभाव में लंबित रह गई थी।

ऐसे सहायक प्राध्यापक पुराने या नए नियमों के तहत प्रोन्नति का विकल्प चुन सकेंगे। इसके साथ ही जिन सहायक प्राध्यापकों को पहले ही कालबद्ध प्रोन्नति योजना या अन्य व्यवस्था के तहत प्रोन्नति मिल चुकी है, उनके पद पर नई नियमावली का कोई असर नहीं पड़ेगा।

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