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नितिन गडकरी मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, इथेनॉल से जुड़े अपमानजनक कंटेंट हटाने के निर्देश

मुंबई 

बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार (05 अगस्त) को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने E20 इथेनॉल-ब्लेंडिंग विवाद में नितिन गडकरी और उनके परिवार को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक और 'अपमानजनक' एआई (AI) कंटेंट को हटाने का आदे्श दिया है। अदालत ने बुधवार को एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए मेटा (Meta) और गूगल (Google) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे गडकरी को E20 ईंधन विवाद से जोड़ने वाले सभी डीपफेक वीडियो और एआई-जनरेटेड तस्वीरों को तुरंत प्लेटफॉर्म से हटाएँ।

ये आदेश जस्टिस आरिफ डॉक्टर की पीठ ने दिया। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश सही और निष्पक्ष आलोचना पर लागू नहीं होगा। गडकरी ने मेटा, X, गूगल/यूट्यूब, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग और "अशोक कुमार/जॉन डो" के रूप में बताए गए अज्ञात उपयोगकर्ताओं के खिलाफ मामला दायर किया था। उस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने माना कि गडकरी द्वारा बताए गए कंटेंट घिनौने और अभद्र थे।

क्या है पूरा मामला?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रहे उन फर्जी वीडियो और पोस्ट को चुनौती दी थी, जिनमें उन्हें और उनके परिवार को सरकार के E20 इथेनॉल-मिश्रण कार्यक्रम में भ्रष्टाचार से जोड़ा गया था। इन पोस्ट्स में दावा किया गया था कि गडकरी के बेटे, निखिल गडकरी, 'सिएन एग्रो इंडस्ट्रीज' (CIAN Agro Industries) के माध्यम से इस नीति से अनुचित लाभ उठा रहे हैं। गडकरी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित है और उनका इससे कोई व्यक्तिगत हित नहीं है।

अदालत की सख्त टिप्पणी: ‘भद्दी और अपमानजनक सामग्री’
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आरिफ डॉक्टर ने इन वीडियो और तस्वीरों को "अत्यंत भद्दी और अपमानजनक" (vile and abusive) करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी सामग्री का सार्वजनिक मंचों पर कोई स्थान नहीं होना चाहिए, क्योंकि ये युवाओं सहित समाज के हर वर्ग के लिए उपलब्ध हैं। अदालत ने कहा कि गडकरी ने अंतरिम राहत के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है।

मामले की सुनवाई 4 सप्ताह बाद
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने कहा, "अगर वादी को भविष्य में और कोई अपमानजनक कंटेंट पता चलता है, तो वे प्रतिवादियों को सूचित करेंगे जो कार्रवाई करेंगे।" सुनवाई के दौरान मेटा के वकील ने कहा, "हो सकता है कि कुछ कंटेंट निष्पक्ष हो।" इस पर गडकरी के वकील ने कहा, "मैं किसी को निष्पक्ष आलोचना करने से नहीं रोक रहा हूं।" जज ने भी कहा, "मैं सहमत हूं कि यह आलोचना के बारे में नहीं है।" कोर्ट ने कहा, "कोई भी अन्य अभद्र सामग्री या डीपफेक तस्वीरें प्रतिवादी को बताई जाएंगी। अगर कोई अस्पष्ट स्थिति होती है, तो उन्हें कोर्ट में जाने की स्वतंत्रता होगी।" मामले की सुनवाई 4 सप्ताह बाद फिर से होगी।

अंतरिम आदेश में अदालत ने कहा, ”ऐसी ही एक इंस्टाग्राम रील के ट्रांसक्रिप्ट के रूप में सामने आई है। इसके अलावा भी अन्य पोस्ट मौजूद हैं। वादी (नितिन गडकरी) जिन सामग्रियों को हटाने की मांग कर रहे हैं, उनके बारे में मैं केवल इतना ही कह सकता हूं कि वे पूरी तरह से घृणित और अपमानजनक हैं। ऐसे कॉन्टेन्ट को किसी भी सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर कोई स्थान नहीं होना चाहिए क्योंकि ये प्लेटफॉर्म्स हर किसी, यहां तक कि बच्चों और युवाओं के लिए भी सुलभ हैं। वादी ने अंतरिम राहत पाने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार पेश किया है। मेटा और गूगल अदालत में उपस्थित हुए और उन्होंने एग्ज़िबिट-सी में लिस्ट कंटेंट को हटाने पर सहमति जताई है। उनका यह बयान रिकॉर्ड पर लिया जाता है।”

इसके बाद अदालत ने मेटा और गूगल को निर्देश दिया कि याचिका में चिन्हित सभी संबंधित आपत्तिजनक, मानहानिकारक और डीपफेक सामग्री को अपने प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाया जाए। मामले की आगे की सुनवाई निर्धारित तारीख पर होगी।

E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित
बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को बड़ी राहत दे दी है। HC ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य डिजिटल मध्यस्थों (Intermediaries) को उनके और उनके परिवार को केंद्र सरकार के E20 एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से जोड़ने वाले कथित मानहानिकारक, डीपफेक और एआई से तैयार फर्जी कंटेंट को हटाने का अंतरिम आदेश दिया है।

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