मध्य प्रदेश

जबलपुर हाईकोर्ट ने मेरिटोरियस शिक्षकों को दी राहत, फिर मिलेगा स्कूल चुनने का मौका

जबलपुर 

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की मिडिल स्कूल शिक्षिका साक्षी ताम्रकार सहित अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर शिक्षक भर्ती में पदस्थापना प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। याचिका में आरोप लगाया गया कि अधिक मेरिट वाले अभ्यर्थियों को पसंद का स्कूल चुन सकेंगे। 

मामले की शनिवार को सुनवाई जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में ऐसा बदलाव नहीं किया जा सकता, जिससे अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हों। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि जनजातीय कार्य विभाग में पहले से पदस्थ मेरिटोरियस अभ्यर्थियों को स्कूल शिक्षा विभाग में चॉइस फिलिंग का अवसर दिया जाए। इसके बाद उनकी मेरिट के आधार पर पदस्थापना की जाए।

2018 की शिक्षक भर्ती से जुड़ा है मामला
दरअसल, 2018 में शिक्षक पात्रता परीक्षा के आधार पर स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग में संयुक्त शिक्षक भर्ती निकाली गई थी। साक्षी ताम्रकार सहित 54 याचिकाओं में अभ्यर्थियों ने बताया कि आरक्षित वर्ग के कई उम्मीदवारों ने सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से भी अधिक अंक हासिल किए थे।

मेरिट के आधार पर उन्हें जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों में नियुक्ति मिली। इसके बाद नवंबर-दिसंबर 2022 में जारी निर्देशों के चलते एक विभाग में नियुक्त होकर जॉइन कर चुके शिक्षकों को रिक्त पदों के लिए होने वाली काउंसलिंग और चॉइस फिलिंग से बाहर कर दिया गया।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बाद के निर्देशों से भर्ती की मूल प्रक्रिया प्रभावित हुई। अधिक मेरिट वाले अभ्यर्थी स्कूल शिक्षा विभाग में अपनी पसंद का स्कूल नहीं चुन सके, जबकि कम मेरिट वालों को पसंदीदा स्कूल मिल गए।

साक्षी ताम्रकार का मामला बना अहम आधार
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रशांत कुमार बड़ारया, अंशुमान सिंह और अमित कुमार चतुर्वेदी ने अभ्यर्थियों की ओर से पक्ष रखा। कोर्ट के सामने साक्षी ताम्रकार के मामले का विशेष उल्लेख किया गया। उनका दस्तावेज सत्यापन पूरा हो चुका था और चॉइस लिस्ट में नाम भी शामिल था। इसके बावजूद ट्राइबल विभाग से नियुक्ति पत्र जारी होने के कारण उन्हें चॉइस फिलिंग का मौका नहीं मिला।

2 महीने में चॉइस फिलिंग, मेरिट से होगी पोस्टिंग
डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि दो महीने के भीतर संबंधित अभ्यर्थियों को स्कूल चॉइस फिलिंग पॉलिसी के तहत प्राथमिकताएं दर्ज करने का अवसर दिया जाए। इसके बाद उनकी मेरिट के आधार पर पदस्थापना तय होगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि नई प्रक्रिया से यदि पहले से कार्यरत कम मेरिट वाले शिक्षक प्रभावित होते हैं, तो उन्हें उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर संबंधित विभाग या दूसरे विभाग में समायोजित किया जाए।

अदालत ने माना कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद चयन की मूल शर्तों और अभ्यर्थियों के अधिकारों को प्रभावित करने वाले बदलाव नहीं किए जा सकते। फैसले से शिक्षक भर्ती-2018 के मेरिटोरियस अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग में पदस्थापना को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर भी इसका असर पड़ सकता है।

Back to top button