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‘महाप्रभु जगन्नाथ’ रिव्यू: भक्ति, एडवेंचर और अहंकार की लड़ाई, बच्चों के लिए फैमिली एंटरटेनमेंट

इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर भक्ति का रंग कुछ ज्यादा ही गाढ़ा नजर आ रहा है. एक तरफ ‘हनुमान अंश’ अपनी कमाई से लगातार चौंका रही है, तो दूसरी तरफ कई विवादों के बाद अब ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ ने सिनेमाघरों में दस्तक दे दी है. खास बात ये है कि ये कोई आम फिल्म नहीं, बल्कि भगवान जगन्नाथ और बलराम की एक एनिमेटेड आध्यात्मिक कहानी है. अब सवाल सीधा है- क्या ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ दर्शकों के दिल में जगह बना पाएगी या ‘हनुमान अंश’ की बॉक्स ऑफिस आंधी के सामने फीकी पड़ जाएगी?

कहानी में भगवान जगन्नाथ बनाम अहंकार का खेल
फिल्म की शुरुआत एक आश्रम से होती है, जहां कई बच्चों को शिक्षा दी जाती है. इन्हीं बच्चों में एक है अहम कुमार, जो बेहद तेज-तर्रार होने के साथ-साथ विद्रोही सोच वाला है. आश्रम से निकलने के बाद उसके मन में एक सवाल घूमता रहता है- आखिर इंसान भगवान में विश्वास क्यों करता है?

लेकिन इस सवाल का जवाब खोजते-खोजते उसकी सोच खतरनाक मोड़ ले लेती है. वह खुद को भगवान से भी ऊपर समझने लगता है और बना देता है अपना एक अलग साम्राज्य- ‘अहमलोक’. इसके बाद अहम कुमार बन जाता है अहमासुर, जिसका मकसद है कि पूरी दुनिया सिर्फ उसी की पूजा करे.

अपने इस मिशन को पूरा करने के लिए अहमासुर भगवान जगन्नाथ के भक्तों को अगवा करवाता है और उन्हें कैद करके अपनी तारीफ करने के लिए मजबूर करता है. यानी एक तरफ अहंकार और सत्ता का नशा, तो दूसरी तरफ भगवान जगन्नाथ और उनके भक्तों की आस्था.

इसी बीच कहानी में एंट्री होती है छोटे से बलराम की, जिसकी दोस्ती खुद भगवान जगन्नाथ से हो जाती है. जब जगन्नाथ और बलराम बढ़ते हुए अहमासुर के खतरे का रास्ता खोजने भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचते हैं, तो वहां उन्हें ऐसा जवाब मिलता है जो पूरी कहानी की दिशा बदल देता है.

इसके बाद शुरू होता है असली एडवेंचर. भगवान जगन्नाथ और बलराम निकल पड़ते हैं लापता भक्तों की तलाश में और पहुंचते हैं नाग लोक, पाताल लोक और स्वर्ग लोक जैसे अलग-अलग रहस्यमयी संसारों में. अब क्या दोनों अहमासुर के किले जैसे अहमलोक में घुसकर भक्तों को बचा पाएंगे? अहमासुर का आखिर क्या होगा? और भगवान ब्रह्मा ने जगन्नाथ को उसके खतरनाक रूप को लेकर ऐसा क्या बताया था? इन्हीं सवालों के जवाब फिल्म आगे देती है.

वॉइस ओवर आर्टिस्ट ने संभाली फिल्म की कमान
एनिमेशन फिल्म में चेहरे भले ही कलाकारों के न हों, लेकिन आवाजें किरदारों में जान जरूर डालती हैं. प्राची सावे साठी ने जगन्नाथ, सोनल कौशल ने बलराम और आदित्यराज शर्मा ने अहमालसुर की आवाज को दमदार तरीके से पेश किया है.

खासकर अहमासुर के किरदार में आवाज का असर कहानी को और ज्यादा खलनायकी रंग देता है. बाकी वॉइस एक्टर्स ने भी अपने हिस्से का काम अच्छे से किया है और यही वजह है कि एनिमेटेड किरदार स्क्रीन पर सिर्फ कार्टून नहीं लगते, बल्कि कहानी का हिस्सा महसूस होते हैं.

डायरेक्शन और विजुअल्स में दिखती है मेहनत
निर्देशक श्रीपद वारखेडकर धार्मिक और पौराणिक कहानियों की दुनिया से नए नहीं हैं. टीवी पर जय जगन्नाथ और अनुर नकुल द असुराज जैसे शो का अनुभव रखने वाले निर्देशक इस बार बड़े पर्दे पर अपनी वही दिव्य दुनिया लेकर आए हैं.

फिल्म में कुछ जगह डायरेक्शन थोड़ा लड़खड़ाता जरूर है, लेकिन कुल मिलाकर फिल्म विजुअली काफी आकर्षक है. नाग लोक से लेकर पाताल लोक और स्वर्ग लोक तक की दुनिया बच्चों और परिवारों को बांधे रखने की कोशिश करती है. हां, कुछ जगह ग्राफिक्स और बेहतर हो सकते थे. फिल्म के VFX कहानी की जरूरत पूरी करते हैं, लेकिन हर जगह उनका स्तर एक जैसा शानदार नहीं दिखता.

कहानी और म्यूजिक बने प्लस पॉइंट
फिल्म की सबसे अच्छी बातों में इसकी राइटिंग और स्क्रीनप्ले शामिल हैं. कहानी को सिर्फ धार्मिक उपदेश बनाने के बजाय इसमें एडवेंचर, रहस्य और बच्चों वाला रोमांच जोड़ने की कोशिश की गई है. म्यूजिक भी कहानी के माहौल को सपोर्ट करता है, लेकिन असली बाजी मारता है अविरल कुमार का बैकग्राउंड स्कोर. कई जगह बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के इमोशन को और ऊपर ले जाता है और फिल्म को बड़े पर्दे वाला फील देता है.

क्या ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ देखनी चाहिए?
अगर आप भक्ति, पौराणिक कहानियों और एनिमेशन फिल्मों में दिलचस्पी रखते हैं, तो ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ एक फैमिली वॉच के तौर पर काम करती है. खासकर बच्चों के साथ सिनेमाघर जाने वाले परिवारों के लिए इसमें एडवेंचर, भगवान की आस्था और अच्छाई-बुराई की लड़ाई का सीधा-सादा फॉर्मूला है.

फिल्म पर रिलीज से पहले विवादों का साया जरूर रहा, लेकिन पर्दे पर आने के बाद इसकी असली परीक्षा अब दर्शकों के हाथ में है. ऊपर से उसी वक्त बॉक्स ऑफिस पर ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्म का दबदबा बना हुआ है, जिसने कमाई के मामले में सबका ध्यान खींच रखा है. तो मुकाबला दिलचस्प है- एक तरफ बजरंगबली की कहानी ने बॉक्स ऑफिस पर माहौल बनाया हुआ है, तो दूसरी तरफ भगवान जगन्नाथ की एनिमेटेड दुनिया दस्तक दे चुकी है.

मेरा मानना है कि ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ कोई परफेक्ट एनिमेशन फिल्म नहीं है, लेकिन परिवार और बच्चों के साथ देखने के लिए इसमें पर्याप्त मसाला, भक्ति और एडवेंचर मौजूद है. अगर आप कहानी में बहुत हाई-लेवल एनिमेशन की तलाश करेंगे तो कुछ जगह निराशा हो सकती है, लेकिन आध्यात्मिक और फैमिली एंटरटेनमेंट के तौर पर फिल्म एक बार मौका जरूर मांगती है.

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