छत्तीसगढ़

भारत में मंदी की आशंका अभी बिल्कुल भी नहीं, मोदी सरकार ने महंगाई पर किया है कंट्रोल : सुधांशू त्रिवेदी

रायपुर

राजधानी रायपुर में आयोजित भाजपा के प्रशिक्षण शिविर में बतौर वक्ता शामिल होने पहुंचे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशू त्रिवेदी ने भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि भारत में मंदी की आशंका अभी बिल्कुल भी नहीं क्योंकि केंद्र में बैठी नरेंद्र मोदी सरकार ने महंगाई पर कंट्रोल करने में सफल रही है। इसी का नतीजा है कि 2014 में कांग्रेस सरकार के समय गैस सिलेंडर 1241 रुपये थी और अभी वर्तमान में फिलहाल उससे सस्ता है।

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सुधांशू ने कहा कि देश ही नहीं बल्कि महंगाई की मार पूरी दुनिया झेल रही है। सिर्फ श्रीलंका और पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि चाइना के ह्यूनान में बैंकों का पेमेंट बंद कर दिया गया है। वहां टैंक लगाए गए हैं, ब्रिटेन और यूरोप में 40 साल की सबसे बड़ी महंगाई आई है। अमेरिका में 45 साल में सबसे बड़ा इंफेलेशन हुआ है, भारत की महंगाई दर 8.5 प्रतिशत है। दुनिया के सबसे बड़े देशों में यह दर सबसे कम है। युक्रेन युद्ध और करोना महामारी की वजह से इसका असर पड़ा है। पिछली यूपीए सरकार के कार्यकाल को याद दिलाते हुए त्रिवेदी ने कहा कि आज एलपीजी सिलेंडर के दाम 1100 कुछ रुपए कुछ हैं, जनवरी 2014 में यही सिलेंडर 1241 रुपए का मिल रहा था। हमने इतनी खराब स्थितियों के बाद भी महंगाई को उस स्तर तक जाने नहीं दिया है। 2009 में भारत की महंगाई दर 12 और साढ़े 10 प्रतिशत रही। यानी की दोहरे डिजिट में, मगर आज हमने इसे डबल डिजिट में जाने नहीं दिया है। हम महंगाई है मान रहे हैं, लेकिन विश्व की तुलना में देखे तो कुशल नेतृत्व की वजह से उसका बेहतर प्रबंधन करने में केंद्र सरकार सफल हैं।

ब्लूमबर्ग के एक सर्वे का हवाला देते हुए त्रिवेदी ने कहा कि भारत में मंदी की आशंका अभी बिल्कुल भी नहीं है। क्रिसिल के चीफ इकनॉमिस्ट के अनुसार अमेरिका की मंदी का असर भारत की मंदी तीव्रता पर देखने को मिल सकता है, मंदी से भारत का निर्यात घट सकता है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को व्यापार करने के लिए डॉलर की जरूरत होती है। कुछ देश को छोड़ दिया जाए तो विश्व के लगभग सभी देश भारत से डॉलर में ही सामान का आयात-निर्यात करते हैं। ऐसे में भारत के इंपोर्ट के खर्च और बढ़ सकते हैं। डॉलर के चढने से रुपये के और नीचे जाने का डर बना हुआ है जो पहले ही 80 प्रति डॉलर के स्तर को छू चुका है।

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