पालीगंज में पुनपुन नदी का पानी उतरने से धान की फसल बर्बाद, किसानों की बढ़ी चिंता

पालीगंज
पुनपुन नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है। इससे बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों ने राहत की सांस ली है। दहिया पंचायत के रूपापुर, बाला बिगहा, हेल्हा तथा कटका पैगम्बरपुर पंचायत के कौरी गांव से बाढ़ का पानी निकल गया है और सूख गया है। लेकिन पानी उतरने के बाद बर्बादी की जो तस्वीर सामने आई है, उसने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। करीब सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।
बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह पुनपुन नदी के उफान पर आने से पालीगंज प्रखंड के नदी किनारे बसे करीब एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था।
दहिया और कटका पैगम्बरपुर पंचायत के निचले इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। तीन से चार दिनों तक खेतों में चार से पांच फीट तक पानी भरा रहा। जिससे खेतों में रोपा गया धान पूरी तरह डूब गया और सड़ गया।
खेतों में सिर्फ सड़ी हुई फसल और मिट्टी की मोटी परत
अब जब पानी सूखा है तो खेतों में सिर्फ सड़ी हुई फसल और मिट्टी की मोटी परत दिख रही है। किसान हाथ पर हाथ धरे खेत के किनारे खड़े हैं। किसानों का कहना है कि इस साल उन्होंने कर्ज लेकर महंगे दर पर धान की रोपनी कराई, पटवन किया और यूरिया, डीएपी खाद डाला। उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी तो कर्ज चुकाकर कुछ बचत होगी। लेकिन बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया।
रूपापुर के किसान सुरेश प्रसाद ने बताया कि पांच बीघा में धान लगाया था, सब खत्म हो गया। बाला बिगहा के किसान राजू कुमार ने कहा कि केसीसी से लोन लेकर खेती की थी, अब बैंक का कर्ज कैसे चुकाएंगे। दोबारा रोपनी का समय भी निकल चुका है, इसलिए इस साल खेत खाली रहने की आशंका है।
प्रभावित गांवों का दौरा कर पीड़ित किसानों से मुलाकात
वहीं किसानों की समस्या को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी चन्दन कुमार ने प्रभावित गांवों का दौरा कर पीड़ित किसानों से मुलाकात की थी। उन्होंने किसानों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। एसडीएम ने कृषि विभाग को निर्देश दिया है कि बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसलों का जल्द से जल्द सर्वे कर आंकलन रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि प्रभावित किसानों को फसल क्षति मुआवजा और सरकारी सहायता का लाभ मिल सके।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार दहिया और पैगम्बरपुर इलाके में सैकड़ों एकड़ से अधिक धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट तैयार कर जिला कृषि पदाधिकारी को भेजी जाएगी।



