बाल विवाह पर अब और कसेगा शिकंजा, सीएमपीओ को मिलेगा कानून और कार्रवाई का गहन प्रशिक्षण

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भोपाल

मध्यप्रदेश में बाल विवाह की रोकथाम को और प्रभावी बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों का राज्य स्तरीय क्षमतावर्धन किया जा रहा है। विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से 6 अक्टूबर को आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के स्वर्ण जयंती सभागार में एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों, बाल विवाह के प्रकरणों में प्रभावी कार्रवाई तथा अन्य संबंधित कानूनों के साथ इसके जुड़ाव पर अधिकारियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कार्यशाला की अध्यक्षता महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया करेंगी। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ सामान्य प्रशासन, राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारी और अधिसूचित बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी शामिल होंगे। बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिले से लेकर ग्राम स्तर तक तथा नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद स्तर पर सीएमपीओ अधिसूचित किए गए हैं। इनमें बाल विकास परियोजना अधिकारियों और पर्यवेक्षकों को भी बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।

कानून की जानकारी से लेकर जमीनी कार्रवाई तक होगा प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सीएमपीओ को केवल कानून की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि बाल विवाह की सूचना मिलने से लेकर उसके प्रभावी प्रतिषेध, संबंधित विभागों के साथ समन्वय, प्रकरणों की रिपोर्टिंग और प्रभावित बालिकाओं के संरक्षण तक उनकी भूमिका को स्पष्ट और प्रभावी बनाना है। अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के साथ किशोर न्याय अधिनियम, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के आपसी जुड़ाव की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण में बाल विवाह के प्रकरणों में कानून के अनुरूप कार्रवाई, संबंधित विभागों और एजेंसियों की भूमिका तथा स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर भी चर्चा होगी। साथ ही बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल की सतत निगरानी और उस पर प्रकरणों की प्रभावी रिपोर्टिंग के संबंध में भी सीएमपीओ की क्षमतावृद्धि की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय की भी दी जाएगी जानकारी

कार्यशाला में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों को विस्तार से समझाने के साथ माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सोसायटी फॉर इन्लाइंटमेंट एण्‍ड वॉलेन्टरी एक्शन एण्ड अनदर वर्सस यूनियन ऑफ इंडिया एण्ड अदर मामले में दिए गए निर्णय की जानकारी भी दी जाएगी। यह सत्र बाल विवाह की रोकथाम के लिए कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिकारियों की जिम्मेदारियों को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा। बाल विवाह के प्रकरणों में पुलिस, विधिक सेवा प्राधिकरण, पंचायती राज संस्थाओं और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष जोर रहेगा। इसी विषय पर विभिन्न विभागों और एजेंसियों के प्रतिनिधियों की पैनल चर्चा होगी, जिसमें बाल विवाह रोकथाम के लिए आपसी सहयोग और मैदानी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

किशोरियों के अनुभव बताएंगे कि बाल विवाह रोकना क्यों जरूरी

कार्यशाला में बाल विवाह रोकने के लिए स्वयं आगे आई किशोरी बालिकाओं को भी अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिलेगा। इससे अधिकारियों को बाल विवाह के सामाजिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को जमीनी अनुभवों के माध्यम से समझने में मदद मिलेगी। कार्यशाला में किशोरी बालिकाओं के सशक्तिकरण और उन्हें बाल विवाह के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए सक्षम बनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा होगी। बाल विवाह की प्रभावी रोकथाम के लिए तैयार की गई व्यावहारिक मार्गदर्शिका और प्रशिक्षण मॉड्यूल का विमोचन भी किया जाएगा। इन सामग्रियों का उद्देश्य सीएमपीओ को कानून के साथ मैदानी परिस्थितियों में कार्रवाई के लिए व्यावहारिक दिशा प्रदान करना है।

पुलिस से पंचायत तक सभी विभागों की भूमिका होगी स्पष्ट

कार्यशाला में बाल विवाह रोकथाम के लिए विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों और उनसे अपेक्षाओं को भी रेखांकित किया जाएगा। पुलिस की भूमिका, विधिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया, पंचायत एवं ग्रामीण स्तर पर निगरानी तंत्र तथा नगरीय निकायों की जिम्मेदारियों को लेकर अधिकारियों के बीच समन्वय को मजबूत किया जाएगा। इस दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के मिशन वात्सल्य, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ टीम, स्टेट सपोर्ट टीम तथा संचालनालय के वरिष्ठ अधिकारी भी सहभागिता करेंगे। यूनिसेफ के प्रतिनिधि भी कार्यशाला में शामिल होंगे।

विशेषज्ञ देंगे कानून और मैदानी कार्रवाई का प्रशिक्षण

कार्यशाला में बाल अधिकार एवं बाल विवाह से जुड़े विषयों के विशेषज्ञ अधिकारियों को प्रशिक्षित करेंगे। सु भारती अली, बाल अधिकार विशेषज्ञ, नई दिल्ली बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय सहित बाल विवाह रोकथाम के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण देंगी।  गुरमुख सिंह लांबा, अधिवक्ता एवं वरिष्ठ तकनीकी सलाहकार, किशोर न्याय समिति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर पीसीएमए के जेजे एक्ट, पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता से जुड़ाव की जानकारी देंगे।  गोविंद बेनीवाल, बाल संरक्षण अधिकारी, यूनिसेफ, मध्यप्रदेश सीएमपीओ की भूमिका, जिम्मेदारियों और बाल विवाह के प्रकरणों की रिपोर्टिंग से संबंधित प्रशिक्षण देंगे।

वरिष्ठ अधिकारी करेंगे मार्गदर्शन

कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त  संदीप जी. आर., सचिव मती जी.व्ही. रश्मि, पंचायत राज संचालनालय के संचालक सह आयुक्त  छोटे सिंह, नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त  संकेत भोंडवे, मध्यप्रदेश पुलिस में महिला सुरक्षा के विशेष पुलिस महानिदेशक  अनिल कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मार्गदर्शन करेंगे। पुलिस उप महानिरीक्षक (सामुदायिक पुलिसिंग) डॉ. विनीत कपूर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजगढ़ के  देवदत्त तथा पंचायत राज संचालनालय के उप निदेशक  सुधीर जैन भी बाल विवाह रोकथाम में अपने विभागों की भूमिका और आपसी समन्वय के विभिन्न पहलुओं पर प्रतिभागियों से संवाद करेंगे।