आबे मेमोरियल कॉरिडोर नई पीढ़ी के लिए एक जीवंत क्लासरूम : सीएम योगी
आबे मेमोरियल कॉरिडोर नई पीढ़ी के लिए एक जीवंत क्लासरूम : सीएम योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में किया आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन
मुख्यमंत्री ने कहा- यह गलियारा बताएगा कि दूरदृष्टि रखने वाले एक नेता की मित्रता कैसे दो देशों के विश्वास में बदलती है
मोदी-आबे की मित्रता पद से नहीं, विश्वास से बनी, पद बदलते रहे, मित्रता नहीं बदली
"रुद्राक्ष" में शिंजो आबे सान की स्मृतियां संजोकर काशी ने दी सच्चे मित्र को श्रद्धांजलि
भारत-जापान की साझेदारी अब सेमीकंडक्टर, एआई और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे भविष्य के क्षेत्रों तक
2027 में राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष, स्मृति गलियारा अमृत पर्व की पहली भेंट
जापान के पास टेक्नोलॉजी है और भारत के पास टैलेंट, जापान के पास अनुभव है और भारत के पास युवा ऊर्जा
आज जब रिश्ते डील से तय होते हैं, ऐसे समय में बिना लाभ हानि का हिसाब लगाए साथ खड़ा रहने वाला मित्र मिलना बहुत कठिन
भारत सौभाग्यशाली है, हमें जापान के रूप में ऐसा ही सच्चा मित्र मिला है
काशी और क्योटो दोनों अपनी-अपनी सभ्यता की आत्मा हैं, दोनों ने सिखाया है कि विरासत को संभालकर भी विकास किया जा सकता है
वाराणसी,
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आबे मेमोरियल कॉरिडोर नई पीढ़ी के लिए एक जीवंत क्लासरूम है। यहां आने वाला हर युवा यह सीख सकेगा कि दूर की सोच रखने वाला एक नेता दो देशों के भविष्य को किस तरह नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय शिंजो आबे सान को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि भारत-जापान की मित्रता हर वर्ष पहले से और अधिक मजबूत होती जाए। वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आबे मेमोरियल कॉरिडोर के लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गलियारा केवल जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे सान की स्मृतियों को संजोने वाला स्थान नहीं, बल्कि भारत और जापान की अटूट मित्रता, विश्वास और साझा विरासत का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 140 करोड़ भारतवासियों की ओर से आबे सान को विनम्र श्रद्धांजलि बताया।
रुद्राक्ष भारत और जापान की दोस्ती का प्रतीक
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि रुद्राक्ष भारत और जापान की दोस्ती का प्रतीक है। जापान ने काशी को रुद्राक्ष दिया और आज काशी उसी रुद्राक्ष में वहां के दोस्ती के प्रतीक जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे सान की स्मृति को हमेशा के लिए बसा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन हम सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। दोस्ती के एक नए आयाम को आगे बढ़ाने के साथ ही, 7 अक्टूबर को, ठीक 25 वर्ष पहले, आज ही के दिन 2001 में प्रधानमंत्री मोदी जी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी। हमारे प्रधानमंत्री और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच मित्रता की नींव भी उसी दौर में पड़ी थी। वर्ष 2007 में मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जापान गए। वहीं उनकी शिंजो आबे सान से पहली भेंट भी हुई थी। यह मित्रता पद से नहीं बनी थी, यह विश्वास से बनी थी। पद बदलते रहे, मित्रता नहीं बदली। जनसेवा की इस यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के दिन उसी मित्रता की स्मृति को समर्पित स्मृति गलियारे का उद्घाटन- इससे सुंदर संयोग नहीं हो सकता।
जब दो नेताओं की मित्रता दो राष्ट्रों का विश्वास बन जाती है, तब इतिहास बदलता है
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगस्त 2007 में प्रधानमंत्री के रूप में भारत की पहली यात्रा पर आए शिंजो आबे सान ने भारत की संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि मजबूत भारत जापान के सर्वोत्तम हित में है और मजबूत जापान भारत के सर्वोत्तम हित में है। 2014 में, क्योटो में काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौता हुआ। 2015 में, काशी की गंगा आरती में भारतीय आस्था का दर्शन किया। 2017 में, अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन का शिलान्यास कर भारत को मोबिलिटी क्रांति के नए युग में ले गए। 2018 में, शिंजो आबे सान ने प्रधानमंत्री मोदी जी को यामानाशी स्थित अपने निजी आवास पर आमंत्रित कर दोनों देशों के संबंधों को एक पर्सनल टच दिया। दिल्ली मेट्रो, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर की हर बड़ी छलांग में जापान हमेशा साथ खड़ा मिला है। आज लगभग 1400 जापानी कंपनियां भारत में कार्य कर रहीं हैं। अब भारत जापान की साझेदारी भविष्य के क्षेत्रों सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स तक पहुंच चुकी है। जापान के पास टेक्नोलॉजी है और भारत के पास टैलेंट। जापान के पास अनुभव है और भारत के पास युवा ऊर्जा। जब दो नेताओं की मित्रता दो राष्ट्रों का विश्वास बन जाती है, तब इतिहास बदलता है। पीएम मोदी और स्वर्गीय आबे शान की मित्रता ऐसी ही थी। 2021 में उन्हें भारत के प्रमुख नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। यह एक सच्चे मित्र का सम्मान था। सितंबर 22 में प्रधानमंत्री जी स्वयं अपने मित्र को अंतिम विदाई देने टोक्यो पहुंचे। पूरे भारत ने राष्ट्रीय शोक रखा। यह प्रोटोकॉल नहीं था, एक रिश्ता था।
जापान के रूप में सच्चा मित्र मिला
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है, निज दुख गिरि सम रज करि जाना, मित्रक दुख रज मेरु समाना, यानी अपने पहाड़ जैसे दुख को धूल समझे और मित्र के धूल जैसे दुख को पहाड़, यही मित्रता की कसौटी भी है। आज की दुनिया में जब रिश्ते डील से तय होते हैं, ऐसे समय में बिना लाभ हानि का हिसाब लगाए साथ खड़ा रहने वाला मित्र मिलना बहुत कठिन है। भारत सौभाग्यशाली है, हमें जापान के रूप में ऐसा ही सच्चा मित्र मिला है। दुनिया इंटरेस्ट देखकर रिश्ते बनाती है, भारत और जापान के रिश्ते ट्रस्ट पर आधारित हैं यानी विश्वास पर आधारित हैं।
जापान के पास प्रिसिजन है, उत्तर प्रदेश के पास स्केल
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी वर्ष फरवरी में मुझे जापान जाने का अवसर मिला। टोक्यो और यामानाशी में जापानी कंपनियों के साथ हजारों करोड़ के निवेश पर समझौते हुए। 500 किलोमीटर प्रति घंटे से तेज चलने वाली मैग्लेव ट्रेन में बैठकर मैंने जापान की प्रिसिजन इंजीनियरिंग को नजदीक से देखा। जिस यामानाशी में आबे सान ने पीएम नरेंद्र मोदी जी को अपने घर आमंत्रित किया था, वही यामानाशी अब उत्तर प्रदेश का ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी का पार्टनर है। अगस्त 2024 में यामानाशी के गवर्नर कोटोरो नागासाकी सान 200 से अधिक निवेशकों के साथ उत्तर प्रदेश आए थे। हम नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यीडा क्षेत्र में 500 एकड़ में एक जापानी सिटी विकसित कर रहे हैं। इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क की स्थापना की गई है। जापान के पास प्रिसिजन है, उत्तर प्रदेश के पास स्केल। 25 करोड़ लोगों का मार्केट, देश का सबसे युवा वर्कफोर्स, एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट का सबसे बड़ा नेटवर्क।
यह गलियारा अमृत पर्व की पहली भेंट
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2027 में भारत-जापान के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह गलियारा उस अमृत पर्व की पहली भेंट है। भारत और जापान ऐसे देश हैं, जिन्होंने अपनी विरासत और परंपराओं को अपने दैनिक जीवन और कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाए रखा है। जापान की संस्कृति हजारों वर्षों की समृद्ध परंपरा में विकसित हुई और उस पर शिंतो तथा बौद्ध परंपराओं का गहरा प्रभाव रहा है। जापान लैंड ऑफ राइजिंग सन है और उत्तर प्रदेश लैंड ऑफ सन डायनेस्टी है, यानी भगवान राम उसी सूर्यवंश में पैदा हुए हैं और इसीलिए उत्तर प्रदेश लैंड ऑफ द सन डायनेस्टी है। सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, कौशाम्बी, संकिसा, भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े सभी तीर्थ उत्तर प्रदेश में हैं। जापान की आस्था का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। काशी और क्योटो दोनों अपनी-अपनी सभ्यता की आत्मा हैं। दोनों ने सिखाया है कि विरासत को संभालकर भी विकास किया जा सकता है।
भाषा अलग-अलग, भाव एक हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा अलग-अलग है, क्षेत्र अलग-अलग है, पर भाव एक हैं और मूल्य एक हैं। अभी तीन दिन पहले जापान के आइची, नागोया में एशियाई खेल संपन्न हुए हैं। भारत के खिलाड़ियों को जापान में जो आत्मीयता मिली, उसने हमारे खिलाड़ियों को बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। इस अपनेपन का अनुभव कराने के लिए मैं जापान की जनता का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने कहा कि यह गलियारा नई पीढ़ी के लिए एक जीवंत क्लासरूम है। यहां आने वाला हर युवा सीखेगा कि दूर की सोच रखने वाला एक नेता दो देशों का भविष्य कैसे बदल देता है। आबे सान को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि भारत-जापान की मित्रता हर साल पहले से और अधिक मजबूत हो।
इस अवसर पर जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे की धर्मपत्नी अकी आबे, प्रदेश सरकार के मंत्री रविंद्र जायसवाल, वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, विधायक सौरभ श्रीवास्तव और जापान से आए हुए प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यगण उपस्थित रहे।
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सीएम योगी ने जापानी मेहमानों का उन्हीं की भाषा में किया स्वागत
मुख्यमंत्री ने जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे की धर्मपत्नी अकी आबे और जापान से आए प्रतिनिधिमंडल का जापानी भाषा में स्वागत किया। उन्होंने कहा, "सेकाईदे मोत्तोमो फुराइतोशी बनारस ए योकोसो।" यानी कि दुनिया के सबसे प्राचीन शहर वाराणसी में मैं आप सबका स्वागत करता हूं। उन्होंने यह भी कहा कि मां गंगा के पावन तट पर बसी देवाधिदेव महादेव भगवान विश्वनाथ की पावन नगरी अविनाशी काशी और भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश की भूमि सारनाथ एवं यहां की समस्त जनता जनार्दन की ओर से मैं श्रीमती अकी आबे सान एवं जापान से आए हुए सभी प्रतिनिधियों का हृदय से स्वागत एवं अभिनंदन करता हूं। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने अरिगातो गोजाइमासु कहकर सभी का धन्यवाद किया।
