गेहूं की रोटी से हो गए हैं बोर? ट्राई करें बेसन, रागी समेत ये 5 हेल्दी विकल्प
भारतीय खाने में रोटी की अपनी खास जगह है. दाल, सब्जी हो या दही, ज्यादातर लोग रोटी के बिना खाना अधूरा मानते हैं. आमतौर पर घरों में गेहूं के आटे की रोटी बनाई जाती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके अलावा भी कई तरह के आटे से रोटी बनाई जा सकती है. बेसन, रागी, बाजरा, जौ और मक्के के आटे से बनी रोटियां खाने में टेस्टी होने के साथ-साथ पोषक तत्व से भी भरपूर होती हैं. इन्हें अपनी डाइट में शामिल करके आप खाने का स्वाद और पोषण, दोनों बढ़ा सकते हैं. तो आइए जानते हैं गेहूं की रोटी के 5 हेल्दी ऑप्शनों के बारे में.
बेसन की रोटी
बेसन यानी चने के आटे से बनी रोटी प्रोटीन का बेहतर सोर्स होता है. प्रोटीन मसल्स को बनाने और उनकी मरम्मत में मदद करता है. बेसन की रोटी खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ भी महसूस होता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और आप ओवरईटिंग से बचते हैं. अगर आप अपनी डाइट में प्रोटीन बढ़ाना चाहते हैं तो बेसन की रोटी आपके लिए बेस्ट ऑप्शन हो सकती है.
रागी की रोटी
रागी की रोटी अपने पोषक तत्वों के लिए जानी जाती है. इसमें कैल्शियम और आयरन पाया जाता है. कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है, जबकि आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी है. रागी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) भी अपेक्षाकृत कम होता है. हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को इसे अपनी डाइट में शामिल करते समय मात्रा और पूरे भोजन का ध्यान रखना चाहिए.
बाजरे की रोटी
सर्दियों में बाजरे की रोटी खूब पसंद की जाती है. इसे आमतौर पर साग, दही या गुड़ के साथ खाया जाता है. बाजरे में फाइबर और दूसरे पोषक तत्व होते हैं. यह पाचन को बेहतर रखने और पेट को देर तक भरा महसूस कराने में मदद कर सकता है. बाजरे की रोटी खाने से शरीर को एनर्जी भी मिलती है. सर्दियों में आप इसे अपनी रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बना सकते हैं.
जौ की रोटी
जौ के आटे से बनी रोटी भी गेहूं की रोटी का बेस्ट ऑप्शन है. जौ में फाइबर पाया जाता है जो डाइजेशन को बेहतर बनाएं रखने में मदद करता है. पर्याप्त फाइबर लेने से कब्ज जैसी परेशानी से बचने में मदद मिल सकती है. जौ की रोटी को आप सब्जी, दाल या दही के साथ खा सकते हैं.
मक्के की रोटी
मक्के की रोटी सर्दियों में खास तौर पर पसंद की जाती है. इसे सरसों के साग के साथ खाने का चलन काफी फेमस है. मक्के में आयरन समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के सामान्य कामकाज में मदद करते हैं. मक्के का आटा प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-फ्री होता है, इसलिए यह उन लोगों के लिए बेस्ट ऑप्शन हो सकता है जिन्हें ग्लूटेन से परहेज करना पड़ता है. हालांकि, ग्लूटेन से जुड़ी बीमारी या एलर्जी होने पर आटे की शुद्धता और मिलावट का ध्यान रखना जरूरी है.
इन बातों का रखें ध्यान
बेसन, रागी, बाजरा, जौ और मक्के की रोटी को अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार डाइट में शामिल कर सकते हैं. हर आटे में पोषक तत्वों की मात्रा अलग होती है, इसलिए किसी एक रोटी को हर लिहाज से सबसे बेहतर मानना सही नहीं है. बैलेंस के लिए रोटी के साथ दाल, हरी सब्जियां, दही या दूसरे प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ भी शामिल करें. अगर आपको डायबिटीज, सीलिएक रोग या कोई दूसरी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है तो डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लें.
